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वाराणसी में सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक हुई मूसलाधार बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। पिछले 24 घंटे में 123.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस मानसून सीजन में अब तक की सबसे अधिक बारिश बताई जा रही है। तेज बारिश के बाद शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया। इसी बारिश का शहर के कारोबार पर भी पड़ा। दुकानों में घुटनों तक पानी घुस गया। सड़कें जलमग्न हो गईं और कई घंटों तक ग्राहक बाजार नहीं पहुंच सके। दैनिक भास्कर ने जलभराव से प्रभावित दुकानदारों और व्यापारी संघ के पदाधिकारियों से बात की। दुकानदारों ने बताया कि हर साल जलभराव से हजारों रुपये का सामान खराब होता है, जबकि व्यापारी संघ का कहना है कि पूरे बाजार को मिलाकर एक बार पानी भरने पर करोड़ों रुपये का नुकसान हो जाता है। दुकान में घुसा एक फीट पानी, 5 हजार का सामान खराब
धूप और अगरबत्ती की दुकान चलाने वाले आशीष कुमार गुप्ता ने बताया कि मंगलवार को हुई बारिश के बाद उनकी दुकान में करीब एक फीट तक पानी भर गया। दुकान के पीछे रखा सामान पानी में भीगकर खराब हो गया। उन्होंने बताया कि गोदौलिया और आसपास के इलाके में हर साल कई बार पानी भरता है। बारिश होते ही सीवर ओवरफ्लो होने लगता है और पानी दुकानों तक पहुंच जाता है। इस बार भी कुछ ही देर की बारिश में सड़क पर करीब दो से ढाई फीट तक पानी भर गया। मैनहोल बंद होने से पानी निकलने में हो रही देरी
आशीष ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान कई जगह मैनहोल और पानी निकासी के रास्ते बंद हो गए हैं। उनका कहना है कि जब पानी निकलने का रास्ता ही बाधित होगा तो बारिश का पानी सड़क और दुकानों में भरना तय है। उन्होंने बताया कि पहले बारिश का पानी धीरे-धीरे निकल जाता था, लेकिन अब निकासी के रास्ते कम होने के कारण पानी लंबे समय तक जमा रहता है। कीचड़ और गंदे पानी के कारण दुकानदारों और ग्राहकों दोनों को परेशानी होती है। रात में बारिश हुई तो नीचे रखा सामान हो जाता है खराब
नई सड़क के दुकानदार छोटेलाल ने बताया कि बारिश के दौरान पानी दुकानों तक पहुंच जाता है। यदि दिन में पानी भरता है तो दुकानदार कुछ सामान ऊपर रखकर बचा लेते हैं, लेकिन रात में बारिश होने पर नीचे रखा सामान पानी में खराब हो जाता है। उन्होंने कहा कि जलभराव का असर सिर्फ सामान पर नहीं पड़ता, बल्कि ग्राहक भी बाजार आने से बचते हैं। मंगलवार को भी लंबे समय तक पानी भरा रहने के कारण ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुंच सके। हर दुकानदार का हजारों का नुकसान होता है। ग्राहक न आने से कारोबार ठप
नई सड़क के ही दुकानदार संजय द्विवेदी ने बताया कि इस इलाके में पहले बारिश के बाद पानी निकलने में काफी समय लगता था। पिछले कुछ सालों से में स्थिति कुछ बेहतर हुई है और पानी पहले की तुलना में जल्दी निकल जाता है। हालांकि उन्होंने कहा कि जब तक सड़क और दुकान के आसपास पानी भरा रहता है, तब तक कारोबार प्रभावित होता है। पानी भरने के दौरान ग्राहक बाजार नहीं पहुंचते और दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ता है। गोदौलिया से दशाश्वमेध तक करीब 400 दुकानें प्रभावित
दशाश्वमेध व्यापार मण्डल के संरक्षक अशोक जायसवाल ने बताया कि गोदौलिया से दशाश्वमेध तक करीब 400 दुकानें हैं। इसके अलावा गिरजाघर और आसपास के रास्तों पर भी बड़ी संख्या में दुकानें हैं। उन्होंने कहा कि जब इस पूरे बाजार में पानी भरता है तो नुकसान किसी एक दुकानदार तक सीमित नहीं रहता। दुकानों में पानी घुसने से सामान खराब होता है, जबकि कई घंटों तक बाजार में ग्राहक नहीं पहुंच पाते। चौक का पानी भी आता है गोदौलिया की ओर
अशोक जायसवाल ने बताया कि गोदौलिया क्षेत्र अपेक्षाकृत निचले हिस्से में है। चौक और आसपास के इलाकों का पानी भी इसी दिशा में आता है और आगे गंगा की ओर निकाला जाता है। लेकिन पानी निकालने वाली सीवर लाइन की क्षमता पर्याप्त नहीं है। तेज बारिश के दौरान अधिक मात्रा में पानी आने पर सीवर और नालियां उसे संभाल नहीं पातीं, जिससे सड़क और दुकानों में जलभराव हो जाता है। रोपवे निर्माण के दौरान शाही नाले की निकासी प्रभावित होने का आरोप
दशाश्वमेध व्यापार मण्डल के संरक्षक ने बताया कि इलाके में पहले एक शाही नाला था, जिससे बारिश का पानी तेजी से निकल जाता था। उनका आरोप है कि रोपवे निर्माण के दौरान होटल देवा इन के पास पिलर लगाने के लिए नाले की खुदाई की गई। बाद में नगर निगम की ओर से नाले की मरम्मत कराने की बात कही गई और कुछ समय तक काम भी चला। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि मरम्मत के बाद नाले से पानी का प्रवाह पहले जैसा नहीं रहा। पिछले मानसून के बाद से पानी निकलने की गति और कम हो गई है। जलकल विभाग की लापरवाही से बिगड़ी व्यवस्था का आरोप
अशोक जायसवाल ने जलकल विभाग पर भी लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रोपवे निर्माण के लिए जिस जगह पिलर लगाने की अनुमति दी गई, वहां पहले से नाला होने की जानकारी विभाग के पास स्पष्ट रूप से होनी चाहिए थी। उनके अनुसार, बाद में पिलर की लोकेशन भी बदली गई, लेकिन अंतिम रूप से जिस स्थान पर काम हुआ, वहां नाले की स्थिति को लेकर समस्या सामने आई। व्यापारी संघ का कहना है कि यदि विभाग के पास भूमिगत नालों और सीवर लाइनों का सही नक्शा होता तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। दुकानों की तस्वीरें…
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काशी में गोदौलिया और नई सड़क पर जलभराव:दुकानों में घुसा पानी, करोड़ों का नुकसान; दुकानदार बोले- नहीं होती नालों की सफाई
