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शेखपुरा में मुफ्त कानूनी मदद का केंद्र शुरू:गांव के लोगों को वहीं मिलेगी सलाह; गरीबों को फ्री मदद, बार-बार कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा




शेखपुरा में आमजनों को निःशुल्क एवं सुलभ विधिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सदर प्रखंड की कुसुम्भा पंचायत सरकार भवन में एक निःशुल्क विधिक सहायता केंद्र का उद्घाटन किया गया। सिविल कोर्ट शेखपुरा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, संतोष कुमार तिवारी ने इसका विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर न्यायाधीश संतोष कुमार तिवारी ने कहा कि न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक उसकी सहज पहुंच सुनिश्चित होना आवश्यक है। उन्होंने इस केंद्र को इसी उद्देश्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। बार-बार न्यायालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे
न्यायाधीश तिवारी ने बताया कि आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर लोगों को उनके अधिकारों की जानकारी और समय पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराना जिला विधिक सेवा प्राधिकार की प्राथमिकता है। ऐसे केंद्रों से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को स्थानीय स्तर पर कानूनी परामर्श और आवश्यक सहायता मिलेगी, जिससे उन्हें छोटी कानूनी समस्याओं के लिए बार-बार न्यायालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उद्घाटन समारोह में अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम नीरज किशोर, विशेष न्यायाधीश पोक्सो रविंद्र कुमार, प्रधान न्यायिक दंडाधिकारी मिट्टू रानी, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव-सह-अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील प्रसाद, न्यायिक पदाधिकारी रोहित रंजन एवं प्रदीप कुमार उपस्थित रहे। विनोद कुमार सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद थे
इस दौरान जिला विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष चंद्रमौली यादव तथा महासचिव विनोद कुमार सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद थे। कुसुम्भा पंचायत के मुखिया संजय कुमार ने सभी अतिथियों को बुके एवं शॉल भेंटकर सम्मानित किया। जिला विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष चंद्रमौली यादव ने कहा कि यह केंद्र ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले गरीब, कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों को स्थानीय स्तर पर कानूनी जानकारी, निःशुल्क कानूनी परामर्श और आवश्यक विधिक सहायता उपलब्ध कराएगा। उन्होंने जोर दिया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है। निःशुल्क विधिक सहायता केंद्र के खुलने से आम ग्रामीणों को न्यायालय तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों में कमी आएगी और उन्हें अपने अधिकारों एवं कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी मिल सकेगी।



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