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राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2021 के बहुचर्चित कोटा दोहरा हत्याकांड मामले के दोषी की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया हैं। अदालत ने कहा कि दोषी बिना पैरोल के 75 साल की आयु तक जेल में रहेगा। यह आदेश जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल व जस्टिस प्रवीर भटनागर की बैंच ने सरकार के डेथ रेफरेंस को खारिज करते और अभियुक्त पिंटू डागर की अपील को आंशिक रुप से स्वीकार करते हुए दिए। दोषी ने अपनी पत्नी और 6 माह के बेटे की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी। जिसे ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ माना था। लेकिन हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि घटना घर के भीतर अचानक हुए झगड़े अथवा कहासुनी का नतीजा थी। अभियुक्त ने गुस्से में कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था। मासूम बच्चे के संबंध में हाईकोर्ट ने कहा है कि बच्चा अपनी मां की गोद में था और हमले के दौरान दुर्भाग्यवश उसे भी जानलेवा चोट लग गई थी। यह सोची-समझी साजिश अथवा योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी हुई घटना नहीं थी। इसलिए इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता हैं। दोषी में सुधार की गुंजाइश
हाईकोर्ट ने अपने अभियुक्त की सामाजिक और आर्थिक हालात पर कहा है कि वह दैनिक मजदूरी करके 7 से 8 हजार रुपए महीना कमाता था। उसके बुजुर्ग माता-पिता के अलावा 14 साल का एक बड़ा बेटा भी है। सेंट्रल जेल जयपुर की रिपोर्ट के अनुसार वह पिछले पांच साल से जेल में है और इस दौरान उसका व्यवहार शांत रहा है। उसमें सुधार की गुंजाइश मौजूद हैं। इसी साल सुनाई थी फांसी की सजा
कोटा निवासी अभियुक्त पिंटू डागर ने एक जून 2021 को अपनी पत्नी और छह महीने के मासूम बेटे की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी थी। एडीजे-2 कोटा ने उसे पत्नी और बेटे की हत्या का दोषी मानकर 23 जनवरी 2026 को फांसी की सजा दी थी। फैसले में कोर्ट ने कहा था कि अभियुक्त ने अपनी बेबस पत्नी और छह महीने के बच्चे की नृशंस हत्या की है और उसमें सुधार की कोई संभावना नहीं है।
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कोटा दोहरा-हत्याकांड, दोषी की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली:हाईकोर्ट ने कहा-75 साल की उम्र तक जेल में रहेगा, घटना अचानक हुए झगड़े का नतीजा
