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कोषागारों से फर्जी वेतन निकासी के मामलों में अब खूंटी भी सीआईडी के राडार पर है। खूंटी स्थित स्पेशलाइज्ड इंडिया रिजर्व बटालियन-2 में हुए 22.46 लाख रुपए के अवैध वेतन निकासी घोटाले की जांच अब सीआईडी करेगी। सीआईडी ने खूंटी थाने में दर्ज पुरानी प्राथमिकी को टेकओवर करते हुए 13 जुलाई को कांड संख्या 15/2026 के रूप में केस री-रजिस्टर किया है। मुख्य आरोपी लेखापाल सिपाही शुभम कुमार पहले ही गिरफ्तार हो चुका है, जबकि सहयोगी सिपाही अजीत कुमार फरार है। सीआईडी अजीत की गिरफ्तारी के साथ इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाल रही है। खूंटी थाने में 21 मई 2026 को कोषागार पदाधिकारी शिव कुमार सिंह के बयान पर कांड संख्या 72/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी सिपाही शुभम कुमार ने सिस्टम में छेड़छाड़ कर फर्जी अस्थायी आईडी बनाई। इसके बाद 2019 से 2021 के बीच करीब 28 किस्तों में 22.46 लाख रुपए का अवैध वेतन तैयार कर अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर लिया। कोषागार गबन के मामले में खूंटी सातवां जिला जिला कोषागारों से वेतन की अवैध निकासी के मामलों की जांच के दायरे में खूंटी सातवां जिला बन गया है। इससे पहले बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, रांची, रामगढ़ व देवघर में सामने आए गबन के मामलों की जांच भी सीआईडी को सौंपी जा चुकी है। बोकारो में 11 करोड़ रुपए की अवैध निकासी के मामले में सीआईडी चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। हजारीबाग में करीब 31 करोड़ रुपए के सबसे बड़े फर्जीवाड़े में छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर हो चुकी है। चाईबासा निकासी के मामले में चार की गिरफ्तारी हुई थी।
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खूंटी कोषागार से फर्जी वेतन निकासी मामला:22.46 लाख रुपए के घोटाले की जांच अब सीआईडी करेगी
