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खोपड़ी से मिला सुराग, दो आरोपियों को आजीवान कारावास:चार साल पहले हत्या कर जमीन में गाड़ दिया था शव; 5 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया




रतलाम में 4 साल पहले हुई हत्या के मामले में कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया है। मृतक की खोपड़ी से मिले सुराग से कोर्ट ने दो आरोपियों को दोष सिद्ध पाते हुए आजीवान कारावास और अर्थदंड की सजा दी है। साथ ही 5 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। फैसला द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की कोर्ट ने सुनाया है। अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने बताया 4 नवंबर 2022 को ग्राम कालाखेत निवासी राजू उर्फ राजपाल को कुछ व्यक्तियों द्वारा जबरदस्ती बाइक पर बैठाकर ले गए थे। काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं मिला। तब परिजनों ने 21 नवंबर 2022 को शिवगढ़ थाना पर गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस जांच में जुटी। 10 दिसंबर 2022 को गुमशुदा राजू उर्फ राजपाल के मामा नाथू सिंह को कमल खराडी के द्वारा बताए जाने पर जामण पाटली तलाई में एक खोपड़ी पड़ी मिली है। डीडी नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस द्वारा मौके से खोपड़ी बरामद की। अन्य मानव अवषेश भी मिले
जांच के दौरान जामण पाटली की तलाई के समीप से मानव अवशेष (हड्डी) बरामद हुए। जिनका विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) इंदौर से जांच कराई। डीएनए टेस्ट के माध्यम से यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हुआ कि बरामद अवशेष मृतक राजू उर्फ राजपाल के ही हैं। इस तरह कोर्ट में चला केस
डीएनए टेस्ट से प्रमाणित होने के बाद पुलिस फिर से जांच में जुटी। साक्षियों के आधार पर मृतक के साथ आखरी बार 4 नवंबर 2022 को आरोपी कालू, बंटी और अन्य के साथ देखा गया था। बचाव पक्ष द्वारा इसके बाद राजू के जीवित होने का कोई साक्ष्य या खंडन प्रस्तुत नहीं किया गया। नाबालिग से जब्त मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच एवं रिकवरी से प्राप्त वीडियो में आरोपियों द्वारा मृतक को ले जाने और उसके साथ मारपीट करने के साक्ष्य भी मिले। जिसमें आरोपी कालू और बंटी व अन्य विधिविरुद्ध बालकों की पहचान हुई। घटनास्थल से मिली मानव हड्डी का डीएनए मिलान मृतक के पिता मांगू उर्फ मांगीलाल से मिला। न्यायालय का यह रहा निष्कर्ष
न्यायालय ने अपने निर्णय में यह माना कि आरोपी कालू और बंटी ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से राजू उर्फ राजपाल का अपहरण किया। उसके साथ मारपीट कर उसकी हत्या की। वैधानिक दंड से बचने के लिए शव को गड्ढे में छिपा दिया। यह कृत्य हत्या की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने आरोपी कालू पिता कांतिलाल अमलियार और बंटी उर्फ कमलेश पिता उदयराम सोलंकी को अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने के गंभीर अपराधों में दोषसिद्ध पाते हुए आजीवन कारावास की सजा दी। अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव चौहान ने बताया कि प्रत्यक्षदर्शियों के अभाव में भी यदि वैज्ञानिक साक्ष्यों, डीएनए रिपोर्ट, डिजिटल/वीडियो साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य कड़ियों को मजबूती से प्रस्तुत किया जाए, तो न्याय की शत-प्रतिशत प्राप्ति होती है।



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