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गुरुग्राम में अडानी रियल एस्टेट कंपनी के मैनेजर युवराज सिंह मानचंदा हत्याकांड में खुलासा हुआ है। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि युवराज ने अपनी पूर्व कलीग आन्या वत्स से करीब एक करोड़ रुपए लेने थे। आन्या ने सेक्टर-70 स्थित फ्लैट में अपने लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा के साथ युवराज की हत्या की प्लानिंग बनाई थी। इसके लिए उसने तीन महीने पहले देसी कट्टा भी खरीदा था। सोमवार को दिल्ली पुलिस ने गुरुग्राम में सीन री-क्रिएशन कराया। पुलिस ने द्वारका एक्सप्रेसवे, सेक्टर-65 और सेक्टर-70 के उन सभी रास्तों का दौरा किया, जहां आरोपी वारदात के वक्त मौजूद थे। इस दौरान आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने किस तरह युवराज को गोली मारी, हथियार को कैसे छिपाया और किस जगह से शव को नाले में धकेला। दिल्ली पुलिस ने पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई है। इस केस में बादशाहपुर थाने के जांच अधिकारी सुहेल खान को सस्पेंड किया जा चुका है। उन पर आरोप है कि उन्होंने शव का अंतिम संस्कार कराने के बाद पुलिस पोर्टल पर डेटा चढ़ाया। फिलहाल दिल्ली की लाजपत नगर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। 2 बड़ी लापरवाही, जिससे केस उलझ गया 1. पोर्टल पर 6 दिन बाद अपडेट, कैटेगरी भी गलत गुरुग्राम पुलिस को युवराज का शव 10 सितंबर को मिला था। दिल्ली पुलिस ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट 11 सितंबर को अंतर-राज्यीय पुलिस पोर्टल पर दर्ज कर दी। इसके बावजूद गुरुग्राम पुलिस ने शव की जानकारी 16 सितंबर को अपलोड की। इतना ही नहीं, डेटा ‘अज्ञात शव मिला’ की जगह ‘अज्ञात व्यक्ति मिला’ कैटेगरी में दर्ज किया गया। इससे दोनों राज्यों के रिकॉर्ड का मिलान नहीं हो सका। 2. 14 सितंबर को कर दिया अंतिम संस्कार पुलिस ने शव मिलने के बाद 72 घंटे का अनिवार्य इंतजार पूरा किया और 14 सितंबर को अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन इससे पहले अंतर-राज्यीय स्तर पर रिकॉर्ड का मिलान नहीं हो सका। पोर्टल पर जानकारी 16 सितंबर को अपडेट हुई, जिससे परिवार को समय रहते युवराज की मौत की सूचना नहीं मिल सकी और वे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए। 6 सितंबर को शॉपिंग करने गया था युवराज मानचंदा युवराज सिंह मनचंदा 6 सितंबर को बहन के साथ लाजपत नगर के सेंट्रल मार्केट में शादी की शॉपिंग करने गया। इसके बाद दोनों K-ब्लॉक स्थित गोल्डन ड्रैगन रेस्टोरेंट पहुंचे। शाम करीब 4 बजे युवराज ने गुरुग्राम में मीटिंग की बात कहकर रात 10 बजे तक लौटने की बात कही। युवराज घर नहीं लौटा और उसका मोबाइल बंद मिला। पांच दिन तक सुराग नहीं मिलने पर बहन हरसिमरन ने शाम 4:15 बजे लाजपत नगर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दी। जांच में पूर्व ऑफिस सहकर्मी आन्या वत्स से बातचीत का पता चला। परिवार ने भी बताया कि युवराज ने गुरुग्राम में आन्या से मिलने की बात कही थी। पुलिस ने आन्या का मोबाइल चेक किया तो वह बंद मिला। नए सिम की जांच से उसकी लोकेशन उत्तराखंड में मिली। दिल्ली पुलिस ने उत्तराखंड पहुंचकर आन्या वत्स और उसके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा को पकड़ा। पूछताछ में दोनों ने युवराज की हत्या में शामिल होने की बात कबूल की। कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस को रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा युवराज की बहन करिश्मा ने साकेत कोर्ट में याचिका दायर कर बादशाहपुर थाने के पुलिसकर्मियों के कब्जे में मौजूद रिकॉर्ड, सामान, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल सामग्री समेत अन्य चीजें सुरक्षित रखने और कोर्ट में पेश करने के निर्देश देने की मांग की थी। साकेत कोर्ट ने आवेदन की सूचना गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए और 22 सितंबर को अदालत के समक्ष पेश किया जाए। इसके बाद रिकॉर्ड को इस मामले की FIR के साथ आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को सौंपने का आदेश दिया गया है।
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गुरुग्राम में कंपनी मैनेजर युवराज हत्याकांड में खुलासा:पूर्व कलीग से ₹1 करोड़ लेने थे; फ्लैट पर मर्डर की प्लानिंग, 3 महीने पहले कट्टा खरीदा
