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गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा:तेज रफ्तार कार ने ग्रिल लगा रहे मजदूरों को कुचला, दो की मौत, तीन गंभीर




गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे पर श्रीराम चौक के पास दिल्ली की तरफ से आ रही एक तेज रफ्तार बीट कार ने डिवाइडर पर लोहे की ग्रिल लगा रहे चार मजदूरों को कुचल दिया। इस भीषण हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर और कार का चालक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। मृत मजदूरों की पहचान बिजेंद्र और पप्पू के रूप में हुई हैं, वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले हैं। द्वारका एक्सप्रेसवे पर यह अब तक का यह सबसे बड़ा हादसा माना जा रहा है, जिसमें एक साथ चार लोग कार की चपेट में आ गए। यह हादसा उस समय हुआ जब एक्सप्रेसवे पर श्रीराम चौक के पास डिवाइडर को सुरक्षित करने के लिए रात को लोहे की ग्रिल लगाने का काम चल रहा था। चार मजदूर ग्रिल लगा रहे थे लोहे की एक भारी ग्रिल को स्थापित करने के लिए कम से कम चार मजदूरों की जरूरत होती है। घटना के वक्त चार मजदूर ग्रिल को सफलतापूर्वक लगाने के बाद दो उनके पेंच कस रहे थे, जबकि दो उसे डिवाइडर पर मजबूती से पकड़कर खड़े थे। तेज रफ्तार कार ने सीधी टक्कर मारी तभी दिल्ली की तरफ से आई तेज रफ्तार बीट कार सीधे ग्रिल पकड़कर खड़े मजदूरों पर चढ़ गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दो मजदूरों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, बाकी के दो मजदूरों ने कार को अपनी तरफ आते देख जान बचाने के लिए एक्सप्रेसवे के बीच बनी ग्रीन बेल्ट की तरफ छलांग लगा दी। लेकिन कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि वह भी अनियंत्रित होकर ग्रीन बेल्ट के अंदर जा घुसी और कूद चुके दोनों मजदूरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में कार के ड्राइवर को भी गंभीर चोटें आई हैं। ठेकेदार की लापरवाही आई सामने
इस दर्दनाक हादसे के बाद एक्सप्रेसवे पर काम करा रहे ठेकेदार की भारी लापरवाही उजागर हुई है। चश्मदीदों और शुरुआती जानकारी के अनुसार, एक्सप्रेसवे जैसी व्यस्त और तेज रफ्तार सड़क पर काम करने के बावजूद सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। मौके पर न तो कोई रिफ्लेक्टिव सावधानी बोर्ड (साइन बोर्ड) लगाया गया था और न ही उचित बैरिकेडिंग की गई थी। दो-तीन सेफ्टी कोन रखे थे ठेकेदार की तरफ से सुरक्षा के नाम पर केवल दो-तीन छोटे लाल रंग के प्लास्टिक सेफ्टी कोन रखे गए थे, जो रात के अंधेरे में तेज रफ्तार वाहनों को सचेत करने के लिए नाकाफी थे। मजदूर पूरी तरह से खुली और चालू सड़क पर काम कर रहे थे। रात के समय अंधेरा होने के कारण कार चालक को सड़क पर काम कर रहे चारों मजदूर दिखाई नहीं दिए, जिसके चलते यह भीषण हादसा हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर वहां पर्याप्त रोशनी और प्रॉपर बैरिकेडिंग होती, तो इन मासूम मजदूरों की जान बचाई जा सकती थी। घायल अस्पताल में भर्ती
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। गंभीर रूप से घायल मजदूरों और कार चालक को तुरंत नजदीकी वाइब्रेंट अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां दो को मृत घोषित किया गया, जबकि घायलों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। बजघेड़ा थाना पुलिस की तरफ से बताया गया है कि मामले की जांच शुरू कर दी है। दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस मामले में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।



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