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बड़वानी में वाल्मीकि समाज ने शनिवार देर रात गोगा नवमी के पावन अवसर पर जाहरवीर गोगा जी महाराज की छड़ी के साथ चल समारोह निकाला। यह शोभायात्रा शहर के पाला बाजार, चंचल चौराहा, झंडा चौक, रणजीत चौक, एमजी रोड और मोती माता चौक जैसे प्रमुख मार्गों से गुजरी, जहां शहरवासियों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर जुलूस का स्वागत किया। चल समारोह में वाल्मीकि समाज के युवाओं का उत्साह देखने लायक था। युवाओं ने अपनी कमर पर करीब 1 क्विंटल से अधिक वजनी और 25 फीट लंबी छड़ी-निशान को बांधकर डीजे की धुन और गोगा देव के जयकारों पर नृत्य किया। श्री गोगाजी का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष नवमी को राजा जेवर सिंह और रानी बच्छल देवी के घर हुआ था। हिंदू, मुस्लिम और सिख तीनों समुदाय के लोग इन्हें ‘जाहर पीर’ या ‘गोगा पीर’ के नाम से पूजते हैं। नर्मदा जल में हुआ निशान का विसर्जन समाज के विनोद चौहान, मनीष बाली, सुनील मार्टिन और योगेश चौहान ने बताया कि पूजन में कुमकुम, रोली, चावल, फूल और गंगाजल का उपयोग कर गोगा देव को खीर, चूरमा और गुलगुले का भोग लगाया गया। नाग पंचमी से शुरू हुई निशान पूजा की यह परंपरा शनिवार देर रात मंदिर परिसर में मेड़ी पूजा के बाद नर्मदा जल से निशान के विसर्जन के साथ संपन्न हुई। सांपों के देवता के रूप में होती है पूजा लोक मान्यताओं के अनुसार, गोगादेव को सांपों के देवता या नागों के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इनकी पूजा-अर्चना करने से सर्पदंश का भय दूर होता है और परिवार में सुख-शांति व समृद्धि आती है। समाजजनों ने लोक देवता गोगा महाराज से क्षेत्र की खुशहाली की प्रार्थना की।
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गोगा नवमी पर निकली 25 फीट लंबी छड़ी यात्रा:गोगा देव को खीर-चूरमा और गुलगुले का भोग लगा, निशान का नर्मदा में विसर्जन
