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कुरुक्षेत्र की जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने पंजाब के प्रॉपर्टी डीलर संदीप सिंह की हत्या के मामले में चंडीगढ़ पुलिस के सिपाही समेत तीन आरोपियों को दोषी माना। कोर्ट ने सिपाही मंजीत सिंह, प्रदीप उर्फ सनी और सुखपाल उर्फ राज निवासी खेड़ी राजो सिंह जिला पटियाला को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही उन पर 18-18 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया। फिरोजपुर जिले के मानो चाहल गांव का रहने वाला संदीप अपने परिवार के साथ मोहाली के नयागांव में रहता था। गांव में खेती के साथ उसकी आढ़त की दुकान थी। मोहाली में वह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम भी करता था। संदीप 21 जून 2021 को अपने दोस्त मंजीत सिंह से पेमेंट लेने की बात कहकर घर से निकला था। इनोवा गाड़ी से पटियाला पहुंचा वह अपनी इनोवा कार, एक जोड़ी कपड़े और अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर लेकर गया था। उसी दिन करीब 8 बजे संदीप ने पत्नी कुलदीप कौर से फोन पर बात की। उसने बताया कि वह मंजीत को उसके गांव छोड़कर पटियाला के एक होटल में रुका हुआ है। अगले दिन भी दोनों के बीच फोन पर बातचीत हुई। 23 जून को फोन पर घबराया था संदीप 23 जून को संदीप की पत्नी से फोन पर बातचीत हुई। इसी दौरान उसके फोन से मंजीत ने भी बात की। पत्नी को संदीप काफी घबराया हुआ लगा। वह जल्दबाजी में बात कर रहा था और फोन कट गया। शाम करीब 7 बजे संदीप ने पत्नी को बताया कि वह चंडीगढ़ के लिए निकल रहा है और करीब दो घंटे में पहुंच जाएगा। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया। अगले दिन भी घर नहीं पहुंचा अगली सुबह यानी 24 जून की सुबह करीब 4 बजे तक संदीप घर नहीं पहुंचा। पत्नी ने मंजीत को फोन किया तो उसने बताया कि संदीप 23 जून शाम करीब 7 बजे ही उसके पास से चला गया था। उसके बाद उसका उससे कोई संपर्क नहीं हुआ। कुछ समय बाद संदीप का शव पंजाब बॉर्डर पर बोधनी गांव नहर के पास उसकी इनोवा कार में पड़ा मिला। मिलने के बहाने मंजीत ने बुलाया पुलिस जांच में सामने आया कि मंजीत ने अपने साथियों के साथ मिलकर संदीप को देवीगढ़ में मिलने के बहाने से बुलाया था। वहां उसे किराये के मकान में बंधक बना लिया गया। आरोपियों ने उसका फोन और लाइसेंसी रिवाल्वर अपने कब्जे में ले लिया। परिवार और पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपी उसके फोन को लेकर दो दिन तक पिहोवा इलाके में घूमते रहे। गोली मारकर की थी हत्या 23 जून की रात बोधनी नहर के पास संदीप की उसी की लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मारकर हत्या कर दी गई। पोस्टमार्टम में उसके घुटने, बाजू, सीने और सिर में गोली लगने की बात सामने आई। पुलिस ने उसकी पत्नी की शिकायत पर केस दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार किया था। 10 लाख रुपये को लेकर था विवाद पुलिस पूछताछ में मंजीत ने बताया था कि वह चंडीगढ़ पुलिस में सिपाही है। विभाग में उसका रिकॉर्ड खराब था और उसके 18 इंक्रीमेंट रोक दिए गए थे। उसकी संदीप से जान पहचान थी। संदीप ने कथित तौर पर उससे कहा था कि उसकी ऊंची पहुंच है और वह उसका पुलिस विभाग का रिकॉर्ड ठीक करा देगा। तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई इसके बदले उसने मंजीत से 10 लाख रुपए लिए थे। मंजीत ने 10 लाख रुपए लेने के करीब डेढ़ साल बाद भी उसका रिकॉर्ड ठीक नहीं करवाया। साथ ही उसकी रकम भी वापस नहीं दी। अब कोर्ट ने तीनों को दोषी करार देकर सजा सुनाई।
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चंडीगढ़ पुलिस के सिपाही समेत तीन को उम्रकैद:पंजाब के प्रॉपर्टी डीलर का मर्डर, बंधक बनाकर मारी थी गाोलियां; कुरुक्षेत्र नहर पर मिला शव
