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चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ चलाए गए अभियान का पहला चरण पूरा हो गया है। 11 से 30 सितंबर तक चले अभियान में पुलिस ने 163 एफआईआर दर्ज कीं और 698 लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया। अब अभियान का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा। इसमें नशा बेचने वालों पर कार्रवाई के साथ नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं को बाहर निकालने पर भी फोकस रहेगा। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने पुलिस और प्रशासन को दूसरे चरण के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अब नशे की लत में फंसे युवाओं की पहचान कर उन्हें उपचार और पुनर्वास से जोड़ने की तैयारी है। नशे की लत में फंसे युवाओं का होगा पुर्नवास दूसरे चरण में उन युवाओं की पहचान की जाएगी, जो नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं। ऐसे युवाओं की सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद उनकी जरूरत के अनुसार उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। पुलिस और प्रशासन यह भी पता लगाएंगे कि ऐसे युवाओं के इलाज के लिए कितने केंद्र, संसाधन और दूसरी सुविधाओं की जरूरत है। मकसद नशे की लत में फंसे युवाओं को दोबारा सामान्य जीवन से जोड़ना है। पुलिस की अपील-नशे की समस्या को लोग न छिपाएं पुलिस ने परिवारों से अपील की है कि अगर उनका बच्चा नशे की समस्या से जूझ रहा है तो उसकी जानकारी छिपाएं नहीं। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में उद्देश्य बच्चे को जेल भेजना नहीं, बल्कि उसे नशे से बाहर निकालना है। परिवारों को विश्वास में लेकर युवाओं को उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। पंजाब-हरियाणा पुलिस के साथ मिलकर होगी कार्रवाई अभियान के दौरान यह भी सामने आया कि नशा सप्लाई करने वाले चंडीगढ़ से सटे पंजाब और हरियाणा के इलाकों में सक्रिय हो सकते हैं। इसे देखते हुए दोनों राज्यों की पुलिस के साथ बैठक की जाएगी। पंजाब के डीजीपी और हरियाणा के अधिकारियों के साथ समन्वय कर सीमावर्ती इलाकों में संयुक्त कार्रवाई की रणनीति तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य चंडीगढ़ में नशे की सप्लाई का नया नेटवर्क बनने से रोकना है। कॉलेजों, हॉस्टलों और विश्वविद्यालयों को भी अभियान से जोड़ेगी पुलिस अगले चरण में शहर के कॉलेजों, हॉस्टलों और विश्वविद्यालयों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। पुलिस का कहना है कि शिक्षण संस्थानों में छात्रों को पकड़ना अभियान का उद्देश्य नहीं है। अगर कोई छात्र नशे से प्रभावित है तो उसकी पहचान कर उसे नशे से बाहर निकालने के लिए संस्थान प्रबंधन के साथ मिलकर काम किया जाएगा। विश्वविद्यालयों को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा। जनता और राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील पुलिस अधिकारियों ने अभियान में जनता, राजनीतिक दलों और मीडिया के सहयोग की सराहना की। अधिकारियों के मुताबिक, अभियान के दौरान किसी आरोपी को छुड़ाने के लिए किसी राजनीतिक व्यक्ति की ओर से दबाव नहीं आया। पुलिस का कहना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में पुलिस और प्रशासन के साथ जनता, राजनीतिक दल, शिक्षण संस्थान और सामाजिक संगठन भी मिलकर काम करें। डीजीपी सागरप्रीत हुड्डा ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान अगले एक महीने तक जारी रहेगा। हालांकि, अब इसकी रणनीति में बदलाव किया जाएगा। मुख्य फोकस बड़े तस्करों, नशे के सप्लाई नेटवर्क और संगठित तरीके से चल रहे नशे के कारोबार पर रहेगा। युवाओं को खेलों से जोड़ेंगे युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें खेल और दूसरी सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। इसी कड़ी में चंडीगढ़ में वॉलीबाल लीग आयोजित की जा रही है, जो 10 अक्टूबर तक चलेगी। इसके अलावा युवाओं के लिए अन्य खेल गतिविधियां भी आयोजित करने की योजना है, ताकि उन्हें नशे से दूर रखकर सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा सके।
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चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ अभियान का दूसरा चरण शुरू:ड्रग्स की लत में फंसे युवाओं की बनेगी लिस्ट; 20 दिन में 163 FIR-698 गिरफ्तारियां
