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चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी किराए पर देने के नए नियम लागू:2 महीने में एग्रीमेंट की जानकारी देनी होगी, विवादों का भी समय पर निपटारा




चंडीगढ़ में किराएदारी के नए नियम गुरुवार(10 सितंबर) से लागू हो गए हैं। चंडीगढ़ प्रशासन के एस्टेट डिपार्टमेंट ने यूटी चंडीगढ़ टेनेंसी रूल्स, 2026 नोटिफाई किए हैं। नए नियमों में किराएदारी एग्रीमेंट की ऑनलाइन जानकारी देना जरूरी किया गया है। इसके लिए एग्रीमेंट होने के 2 महीने के भीतर रेंट अथॉरिटी को जानकारी देनी होगी। किराया, बिजली-पानी और मेंटेनेंस को लेकर विवाद होने पर भी रेंट अथॉरिटी में आवेदन किया जा सकेगा। नियमों में विवादों के निपटारे और अदालत के आदेशों की पालना के लिए समयसीमा भी तय की गई है। प्रशासन 3 महीने में किराएदारी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार करेगा। इससे किराएदारी से जुड़े रिकॉर्ड ऑनलाइन होंगे और विवादों का जल्द निपटारा किया जा सकेगा। डिप्टी कमिश्नर एवं एस्टेट ऑफिसर निशांत कुमार यादव ने कहा कि नए नियमों से किराएदारी व्यवस्था में पारदर्शिता और स्थिरता आएगी। अब 4 पॉइंटों में जानिए नए नियम… नए नियमों से जुड़े सवालों के जवाब… 1. नया सिस्टम क्यों लाया गया?
पुरानी किरायेदारी व्यवस्था में विवादों के निपटारे की प्रक्रिया लंबी और जटिल थी। नए नियमों में रेंट अथॉरिटी, रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल की तीन-स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है, ताकि किराएदार और मकान मालिक से जुड़े विवादों का समयबद्ध तरीके से निपटारा हो सके। 2. रेंट कितना तय है?
प्रशासन ने कोई फिक्स न्यूनतम या अधिकतम मासिक किराया तय नहीं किया है। किराया मकान मालिक और किरायेदार के आपसी समझौते तथा आसपास के क्षेत्र में चल रहे प्रचलित किराए के आधार पर तय होगा। 3. क्या हर प्रॉपर्टी के लिए एग्रीमेंट जरूरी है?
हां। किरायेदारी समझौते की जानकारी एग्रीमेंट लागू होने के 2 महीने के भीतर मकान मालिक या किरायेदार को संयुक्त रूप से या अलग-अलग ऑनलाइन रेंट अथॉरिटी को देनी होगी। इसके बाद 7 दिनों के भीतर UIN जारी किया जाएगा। 4. पुराने किरायेदारों पर भी लागू होंगे नियम?
नियमों के तहत मौजूदा वैध किरायेदारी व्यवस्थाओं को भी नए कानूनी ढांचे के दायरे में लाया गया है। पुराने अनौपचारिक समझौतों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत दर्ज कराना होगा। 5. एग्रीमेंट की जानकारी नहीं देने पर क्या होगा?
नियमों में तय प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर संबंधित वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई या जुर्माने का प्रावधान हो सकता है। ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार रेंट अथॉरिटी की प्रक्रिया अपनानी होगी।



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