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बदायूं में अमर ज्योति चिटफंड कंपनी के करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच आने वाले दिनों में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को ट्रांसफर हो सकती है। नियम के मुताबिक, 50 लाख रुपए से अधिक के आर्थिक अपराधों की जांच थाना स्तर के बजाय EOW या CBCID से कराने का प्रावधान है। हालांकि, फिलहाल इस मामले की जांच बदायूं पुलिस ही कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच सही दिशा में चल रही है और मुख्य आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। अमर ज्योति चिटफंड मामले में दर्ज मुकदमों की जांच के दौरान पुलिस को अब तक करीब 25 से 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के सबूत मिले हैं। इससे साफ है कि मामला सामान्य आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े आर्थिक अपराध से जुड़ा है। इसी आधार पर आगे जांच EOW या CBCID को सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है। 100 से 500 करोड़ तक के घोटाले के दावे घोटाले की कुल रकम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ लोग इसे करीब 100 करोड़ रुपए का घोटाला बता रहे हैं, जबकि कुछ दावों में रकम 500 करोड़ रुपए तक बताई जा रही है। हालांकि, पुलिस की अब तक की जांच में बदायूं से जुड़े मामलों में 25-30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के प्रमाण मिले हैं। पूरे नेटवर्क और कुल रकम की स्थिति विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। सैकड़ों एजेंटों के जरिए निवेश के नाम पर जुटाई रकम बरेली के कटरा चांदखां निवासी शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य पर अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड नाम से चिटफंड कंपनी चलाने का आरोप है। आरोप है कि दोनों ने बदायूं और बरेली के लोगों को कंपनी के सैकड़ों एजेंटों के जरिए निवेश के नाम पर जोड़ा। निवेशकों से करोड़ों रुपए जमा कराए गए और बाद में उनकी रकम हड़पने का आरोप लगा। पुलिस बोली- अभी ट्रांसफर की जरूरत नहीं एसएसपी अंकिता शर्मा ने बताया कि फिलहाल अमर ज्योति चिटफंड मामले की जांच बदायूं पुलिस कर रही है। मुख्य आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। अभी ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, जिसके चलते जांच ट्रांसफर करने की जरूरत हो। उन्होंने कहा कि आगे यदि ऐसा कोई मुद्दा सामने आता है तो सरकार की मंजूरी के बाद जांच EOW या CBCID को ट्रांसफर की जा सकती है।
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चिटफंड घोटाले की जांच EOW को हो सकती है ट्रांसफर:बदायूं पुलिस को अब तक 25-30 करोड़ की धोखाधड़ी के सबूत मिले
