Headlines

16 की उम्र में मां बनी,फिर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ीं:पिता ने कहा था- घर में गाय-भैंस हैं, बिजनेस यहीं कर लो; बेटी ने रीजनल फिल्मों के लिए बनाया बड़ा मंच




मेरी शादी बहुत कम उम्र में हो गई थी। करीब 16-17 साल की उम्र में मैं मां बन गई थी। बाद में मैंने अपनी जिंदगी के बारे में खुद फैसला लिया और तलाक लिया। मैं यह बर्दाश्त नहीं कर सकती थी कि कोई मुझ पर हाथ उठाए। इस फैसले के खिलाफ मुझे अपने परिवार और समाज का सामना करना पड़ा। ये कहना है राजस्थान फिल्म फेस्टिवल (आरएफएफ) की फाउंडर संजना शर्मा का। संजना शर्मा ने फिल्म इंडस्ट्री, फिर आरएफएफ की शुरुआत से लेकर अब तक के सफर पर भास्कर से बातचीत की। आगे पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: राजस्थान फिल्म फेस्टिवल शुरू करने का विचार आपके मन में कैसे आया? संजना शर्मा: मैं फिल्म इंडस्ट्री में एक्टर के तौर पर काम करने आई थी। जब इंडस्ट्री को करीब से देखा तो महसूस हुआ कि देश के लगभग हर राज्य में अपनी फिल्म इंडस्ट्री और फिल्म फेस्टिवल हैं। देश में राष्ट्रीय पुरस्कार और कई बड़े फिल्म समारोह भी होते हैं। मेरे मन में विचार आया कि क्यों न अलग-अलग राज्यों की क्षेत्रीय फिल्म इंडस्ट्री को एक मंच पर लाया जाए और क्षेत्रीय सिनेमा का एक बड़ा फेस्टिवल बनाया जाए। इसी सोच के साथ हमने 2013 में राजस्थान फिल्म फेस्टिवल की नींव रखी। शुरुआत राजस्थानी फिल्मों से की। जब लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला तो धीरे-धीरे दूसरी क्षेत्रीय फिल्म इंडस्ट्री को भी इससे जोड़ना शुरू किया। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि किसी भी इंडस्ट्री को आगे बढ़ना है तो मिलकर आगे बढ़ना होगा। अकेले आगे बढ़ने के बजाय अगर अलग-अलग क्षेत्रीय सिनेमा एक-दूसरे से जुड़े, एक-दूसरे की कहानियां समझे और एक-दूसरे का सहयोग करें तो इसका फायदा पूरी फिल्म इंडस्ट्री को मिलेगा। सवाल: फेस्ट की जर्नी के बारे में बताएं। किस तरह इस फेस्टिवल को बड़ा बनाया? संजना शर्मा: 2019 में हमने इसे बड़े स्तर पर प्रस्तुत किया। उस समय अभिनेता श्रेयस तलपड़े ने फेस्टिवल को होस्ट किया था। उसी दौरान सतीश कौशिक की हरियाणवी फिल्म ‘छोरियां छोरों से कम नहीं होतीं’ भी आई थी। उन्होंने हमारे फेस्टिवल को देखा और मेरे विजन की सराहना की। उन्होंने कहा था कि जिस स्तर पर यह फेस्टिवल आयोजित हो रहा है, आने वाले समय में यह देशभर में अपनी पहचान बनाएगा। एक लड़की होकर इस तरह का काम करने और अपने विजन को लगातार आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने मुझे बधाई दी। उनके शब्द मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं। मैं चाहती थी कि राजस्थान की फिल्म इंडस्ट्री भी आगे बढ़े। इसी सोच के साथ हमने दूसरे राज्यों के क्षेत्रीय सिनेमा को जोड़ा। आज हमारे साथ करीब 15 राज्यों की क्षेत्रीय फिल्में आ रही हैं। फेस्टिवल में अलग-अलग राज्यों के कलाकार और फिल्मकार एक-दूसरे के साथ संवाद करते हैं। टॉक शो होते हैं, जिनमें लोग अपने सिनेमा, अपनी कहानियों और अपनी चुनौतियों के बारे में बात करते हैं। इन चर्चाओं से क्षेत्रीय सिनेमा की एक नई तस्वीर सामने आती है। सवाल: 14 साल की यह यात्रा बाहर से आसान लग सकती है, लेकिन निश्चित तौर पर इसमें कई मुश्किलें भी आई होंगी। सबसे बड़ी चुनौती क्या रही? संजना शर्मा: सबसे बड़ी चुनौती लोगों का भरोसा जीतना था। जब मैंने शुरुआत की तब मेरी उम्र भी बहुत कम थी। लोग सवाल करते थे कि एक बार तो फेस्टिवल कर लिया, लेकिन क्या अगली बार भी कर पाओगी? क्या इसे लगातार चला पाओगी? आज मेरी 14 साल की यात्रा ही उन सवालों का जवाब है। दूसरी बड़ी चुनौती थी प्रायोजन जुटाना। शुरुआत में हमने 550 से ज्यादा कंपनियों से संपर्क किया, लेकिन कोई हमारे साथ जुड़ने को तैयार नहीं था। फिर तीन लोगों ने मेरे विजन पर भरोसा किया और पहला कदम आगे बढ़ाया। खास बात यह है कि वे लोग आज भी हमारे साथ जुड़े हुए हैं। आज उन्हें भी गर्व होता है कि वे इतने बड़े फेस्टिवल का हिस्सा हैं। अब हमारे साथ ऐसे युवा भी जुड़े हैं, जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम करते हैं। वे फेस्टिवल के लिए अपनी नौकरी से पांच दिन की छुट्टी लेते हैं। पूरी मेहनत के साथ इसे अपने मुकाम तक पहुंचाने में जुट जाते हैं। मेरे लिए यह किसी भी अवॉर्ड से कम नहीं है कि लोग इस फेस्टिवल को अपना समझकर इसके लिए काम करते हैं। सवाल: एक छोटे शहर की लड़की, जिसने कई सपने लेकर जयपुर का रुख किया था, क्या आज उसके सारे सपने पूरे हो चुके हैं? संजना शर्मा: मैंने हमेशा सपने बड़े देखे हैं और आज भी देखती हूं। मेरा जन्म बीकानेर में हुआ। मैं एक पारंपरिक परिवार से आती हूं, जहां लड़कियों के लिए जीवन के फैसलों को लेकर बहुत सीमाएं थीं। मेरे परिवार में किसी लड़की ने इस तरह का रास्ता नहीं चुना था। मैंने अपने जीवन में एक साथ कई ऐसे फैसले लिए, जिन्हें उस समय विद्रोह माना गया। मेरी शादी बहुत कम उम्र में हो गई थी। करीब 16-17 साल की उम्र में मैं मां बन गई थी। बाद में मैंने अपनी जिंदगी के बारे में खुद फैसला लिया और तलाक लिया। मैं यह बर्दाश्त नहीं कर सकती थी कि कोई मुझ पर हाथ उठाए। इस फैसले के खिलाफ मुझे अपने परिवार और समाज का सामना करना पड़ा। इसके बाद मैं फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी, जबकि हमारे परिवार का इस इंडस्ट्री से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था। मेरे पिता कहते थे कि घर में गाय-भैंस हैं, बिजनेस करना है तो यहीं कर लो। लेकिन मेरे सपने कुछ और थे। मैं अपनी बेटी को साथ लेकर इस इंडस्ट्री में आगे बढ़ी। तलाक के बाद गांव, समाज और परिवार से दूरी भी बनी। वह दौर बिल्कुल आसान नहीं था। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। सवाल: उस संघर्ष के दौर में आपको आगे बढ़ने की ताकत कहां से मिली? संजना शर्मा: मेरा मानना है कि सपने हमेशा बड़े देखने चाहिए। मैंने अपनी जिंदगी में बहुत सारे रिजेक्शन देखे हैं। कई बार लगा कि शायद रास्ता बंद हो गया है, लेकिन हर बार मैंने खुद को संभाला और आगे बढ़ी। आज मेहनत के दम पर मैंने अपनी एक पहचान बनाई है। राजस्थान की प्रमुख विज्ञापन निर्माण कंपनियों में मेरी पहचान है। मैंने राजस्थान की बड़ी-बड़ी कंपनियों को बड़े कलाकारों के साथ जोड़ा है। आज पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि संघर्ष का हर दौर जरूरी था। उसी ने मुझे मजबूत बनाया। और आज मैं यह महसूस करती हूं कि मैंने बहुत कुछ पा लिया है, अब देने का समय है। राजस्थान फिल्म फेस्टिवल भी इसी सोच का हिस्सा है। मैं चाहती हूं कि सिनेमा के लिए बेहतर माहौल बने, नए कलाकारों और फिल्मकारों को मंच मिले और क्षेत्रीय सिनेमा को वह सम्मान मिले जिसका वह हकदार है। मेरे भाई दशरथ जोशी ने मेरे हर फैसले को सम्मान दिया और उसने मेरे साथ खड़े रहकर इस फेस्ट को सबसे बड़ा बनाया। अब मेरी एक शिकायत जरूर है और वह सरकार से जुड़ी हुई है। सरकार को ऐसे फिल्म फेस्टिवल की वैल्यू समझनी चाहिए। अगर सरकार और फिल्म इंडस्ट्री साथ मिलकर काम करें तो राजस्थान में सिनेमा को बहुत आगे ले जाया जा सकता है। सवाल: इस बार राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में क्या खास देखने को मिलेगा? संजना शर्मा: इस बार फेस्टिवल को और ज्यादा रंगारंगी और मनोरंजक बनाने की कोशिश की गई है। 24 श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे। इस बार फेस्टिवल को अभिनेता शरमन जोशी और ईशा कोप्पिकर होस्ट कर रहे हैं। इस बार हमने संगीत पर भी विशेष ध्यान दिया है। आमतौर पर हम गायन और नृत्य को लगभग बराबर जगह देते हैं, लेकिन इस बार गायन का हिस्सा थोड़ा ज्यादा रखा गया है। हमारा उद्देश्य है कि दर्शकों को अलग-अलग राज्यों की संस्कृति और संगीत एक ही मंच पर सुनने और देखने को मिले। राजस्थानी लोक संगीत के साथ जैसलमेरी लोक रंग भी देखने को मिलेगा। रविंद्र उपाध्याय, कुतले खान, हनी ट्रूपर, रिनी चन्द्रा, मुस्कान और श्रवण सागर जैसे कलाकार प्रस्तुति देंगे। पंजाब से अभिनेत्री सोना भी प्रस्तुति देंगी। इस तरह कई राज्यों के कलाकार अपनी कला के रंग बिखेरेंगे। पुरस्कार समारोह और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ फिल्मों पर चर्चा भी होगी। अलग-अलग राज्यों के कलाकार और फिल्मकार टॉक शो में शामिल होंगे और सिनेमा से जुड़े नए विषयों पर बातचीत करेंगे।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *