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चौहटन के पहले पालिका अध्यक्ष बने राठौड़, विपक्ष जीरो:बाड़मेर में सभापति के लिए अब भाजपा-कांग्रेस में सीधा मुकाबला




नगरपरिषद अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन वापसी के अंतिम दिन शुक्रवार को एसडीएम कार्यालय में दिनभर सियासी ड्रामा और गहमागहमी का दौर चलता रहा। कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं की गाड़ियां दफ्तर के चक्कर काटती नजर आई। दिनभर चली उठापटक और अफवाहों के बाजार के बीच दोपहर 2:55 बजे डेडलाइन से ठीक 5 मिनट पहले निर्दलीय प्रत्याशी मधुलता ने कांग्रेस के समर्थन में अपना नामांकन वापस ले लिया। अब सभापति की कुर्सी के लिए भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला तय हो गया है। दोपहर 2:45 बजे अचानक गाड़ियों के बड़े काफिले के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी निर्दलीय प्रत्याशी मधुलता को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। उन्होंने एसडीएम के समक्ष पहुंचकर पर्चा वापस लेने की मंशा जाहिर की। इसके बाद एसडीएम दफ्तर के सभाकक्ष में कांग्रेस नेताओं, प्रत्याशी और उनके परिजनों के बीच करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई। जयमलसिंह को लेकर दिनभर चली अफवाहें इससे पहले सुबह से ही कांग्रेसी प्रत्याशी जयमलसिंह को लेकर तरह-तरह की अफवाहों का दौर गरम रहा। अफवाह फैली कि जयमलसिंह को भाजपा नेताओं ने उठा लिया है। स्थिति स्पष्ट न होने के कारण दोपहर करीब 12:30 बजे कांग्रेसी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग एसडीएम दफ्तर के बाहर जुटने शुरू हो गए। इसके बाद जयमलसिंह ने वीडियो कॉल के जरिये कांग्रेस पदाधिकारियों से बात की, तब स्थिति स्पष्ट हुई। क्रॉस वोटिंग का डर, कांग्रेस प्रयास में जुटी निर्दलीय के मैदान से हटने के बाद अब मुकाबला भाजपा के गौतमचंद सिंघवी और कांग्रेस के जयमलसिंह के बीच ही बचा है। ऐसे में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पार्षदों को एकजुट रखना और क्रॉस वोटिंग के खतरे को टालना है। वहीं कांग्रेस का पूरा जोर अपना कोरम पूरा करने और बागी व निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाने पर टिका हुआ है।



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