10-12 फीट की कोठरी, सामने छोटा सा गार्डन, दीवार पर हनुमान जी और भगत सिंह की तस्वीरें और आसपास तैनात गार्ड। हाई-सिक्योरिटी वाली साबरमती जेल में यही गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की दुनिया है। दावा किया जाता है कि यहीं से लॉरेंस अपनी ‘L-कंपनी’ चला रहा है। खु
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इन दावों में कितना दम है, उसके करीबी और भरोसेमंद कमांडर कौन हैं, जेल में लॉरेंस की जिंदगी कैसी है और उसका रूटीन क्या है? दैनिक भास्कर ने लॉरेंस के करीबियों और जेल में अपने सूत्रों से इसकी पड़ताल की।
शुरुआत साबरमती जेल से… 18-20 फीट ऊंची दीवारों वाली जेल में बंद हाईप्रोफाइल कैदी
68 एकड़ में फैली गुजरात की साबरमती जेल। मेन गेट के बाहर चबूतरे पर छोटा सा हनुमान मंदिर है। इसके बाद अंदर दाखिल होते ही द्वारेश्वर महादेव मंदिर है। इसमें महादेव से लेकर दक्षिण भारत में पूजे जाने वाले अयप्पा भगवान भी मौजूद हैं। पूछने पर पुजारी बताते हैं कि साउथ के एक अधिकारी ने पोस्टिंग के वक्त इन्हें स्थापित करवाया था।

साबरमती जेल के मेन गेट के बाहर मौजूद हनुमान मंदिर की फोटो।

साबरमती जेल के अंदर मौजूद द्वारेश्वर महादेव मंदिर।
मंदिर के ठीक सामने तैनात पुलिस जवान से हमने लॉरेंस के बारे में पूछा। उसने कहा- ‘सबसे हाईप्रोफाइल कैदी है।‘
हमने पूछा- आपने कभी देखा है। जवाब मिला- ‘अभी नहीं। वो कहीं आता-जाता नहीं। मेरी भी कुछ महीने पहले ही यहां पोस्टिंग हुई है।’
हमने पूछा- उसकी चर्चा तो होती होगी। इस पर बोले- ’लोग कहते हैं कि बड़ा हनुमान भक्त है।’
हमने पूछा पुरानी जेल का गेट किधर है? जवान ने इशारा करते हुए कहा- ’लेफ्ट जाइए। 500-700 मीटर दूर राइट में दिख जाएगा।’
आगे बढ़े तो सामने 18-20 फीट ऊंची दीवार पर एक बड़ा सा गेट मिला। वहां से आम लोग और पुलिस वाले आ-जा रहे थे। गेट पर बैठे एक पुलिसवाले से हमने पूछा कि लॉरेंस बिश्नोई यहीं बंद है न। क्या आपने उसे देखा है? जवाब मिला, ’हमारी ड्यूटी जेल के बाहर रहती है। अंदर सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही गए हैं। लॉरेंस को एक बार देखा है। बहुत शांत है, ज्यादा बात नहीं करता।’

साबरमती सेंट्रल जेल की पुरानी जेल में जाने के लिए यही गेट है। सूत्रों के मुताबिक, इसी में मौजूद बैरक में लॉरेंस को रखा गया है।
बैरक में लॉरेंस अकेला नहीं, 4-5 सेवादार और 3-4 गार्ड तैनात
मीडिया में खबरें छपीं कि लॉरेंस जेल की बैरक में मौजूद 10 कमरों में अकेला रहता है। इसके बारे में हमने जेल में तैनात अपने सूत्रों से पूछा। उसने बताया- ’लॉरेंस को जेल के आइसोलेटेड हिस्से में रखा है, लेकिन वो अकेला नहीं रहता। उसकी बैरक का नाम 10 खोली है। उसके आसपास 500 मीटर तक कोई दूसरी बैरक नहीं है।’
’बैरक का नाम 10 खोली इसलिए पड़ा था क्योंकि पहले इसमें 10 कमरे हुआ करते थे। जेल पुरानी हुई, तो कुछ कमरे जर्जर होकर गिर गए। अब नए कंस्ट्रक्शन में 4-5 कमरे ही हैं। लॉरेंस इसी में 10-12 फीट की एक कोठरी में रहता है। इसके कोने में टॉयलेट है। छत से लगा एक रोशनदान और कोठरी के सामने एक गार्डन है।’
वे आगे बताते हैं, ’लॉरेंस के रोजमर्रा के कामों के लिए 4-5 सजायाफ्ता कैदी हैं। वे खाना बनाने से लेकर कपड़े धुलने और साफ-सफाई तक सारा काम करते हैं। गार्डन की देखरेख के लिए एक माली है। लॉरेंस को धमकियां मिलती रही हैं, इसलिए उसकी सुरक्षा में हमेशा 3-4 गार्ड भी तैनात रहते हैं।‘
लॉरेंस की कोठरी के अंदर क्या है? वे बताते हैं, ‘अंदर हनुमान जी और भगत सिंह की एक फोटो है। लॉरेंस कॉलेज के समय से कमरे में इनकी फोटो लगाता है। बाकी सोने के लिए पलंग और बिस्तर है। कमरे में फल जरूर रहता है।‘ हमने पूछा क्या वो कैदियों वाले कपड़े पहनता है। जवाब मिला- ‘नहीं, वो सादे कपड़े ही पहनता है।’

किसी बड़ी कंपनी की तरह चल रहा लॉरेंस का नेटवर्क
हमने लॉरेंस के करीबी से भी बात की। उनसे पूछा कि लॉरेंस के जेल से गैंग चलाने के दावे कितने सही हैं। पहचान जाहिर न करने की शर्त पर वे बताते हैं, ‘कम्युनिकेशन टूल्स के जरिए जैसे बड़ी कंपनियां चलती हैं, वैसे ही लॉरेंस का नेटवर्क चलता है। ऐसी बहुत सी डिवाइस और फोन हैं, जिनकी कॉल रिकॉर्ड नहीं हो सकती। न कॉल हिस्ट्री निकल सकती है।’
’अमेरिका की एक कंपनी ऐसी ही डिवाइस बनाती है। इस हैंडमेंड फोन की कीमत साढ़े 8 से 9 लाख रुपए से है। इसे ऑर्डर पर बनवाया जाता है। लॉरेंस भी ऐसी ही किसी डिवाइस का इस्तेमाल करता होगा।’
हमने पूछा कि वो इस्तेमाल करता है या करता होगा। जवाब मिला- ’आपको क्या लगता है कि लॉरेंस को ऐसी डिवाइस की कमी होगी।’
लॉरेंस की गैंग में कितने लोग हैं? वे बताते हैं, ’कम से कम 10 तो गैंग के ऑपरेटिव ही हैं, जैसे- अमेरिका में आरजू बिश्नोई, तिहाड़ जेल में बंद उसका भाई अनमोल बिश्नोई, संपत नेहरा, संदीप उर्फ काला जठेड़ी, हाशिम बाबा और केबल बाबा। अभी नीचे के पदों में उसके सबसे भरोसेमंद लोग हैं। कम से कम 500 लोग हैं, जिनसे लॉरेंस लगातार संपर्क में रहता है। ये सारे शूटर हैं।’

शूटर के जेल जाने पर परिवार को सपोर्ट
लॉरेंस की गैंग कैसे चलती है? लॉरेंस के रिश्तेदार बताते हैं, ‘अगर गैंग के किसी सदस्य की मौत हो जाए या वो जेल चला जाए, तो उसके परिवार की जिम्मेदारी लॉरेंस कंपनी उठाती है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, बेटी की शादी और बुजुर्गों की देखभाल का इंतजाम करती है।‘
इसके लिए पैसा कहां से आता है? इस पर वे कहते हैं, ‘गैंगस्टर को पैसों की क्या चिंता है।‘ हमने पूछा- क्या फिरौती और रंगदारी से पैसा आता है? जवाब मिला-
हां, अगर ये नहीं करेंगे, तो गैंग कैसे चलेगी। हालांकि गरीबों को नहीं सताते। उन्हीं से लेते हैं, जिनके पास पैसा है।

गैंग के लोग लॉरेंस नहीं, गुरु जी कहते हैं
लॉरेंस के करीबी बताते हैं, ‘गैंग में कोई लॉरेंस या उसका असली नाम सतेंदर सिंह नहीं लेता। सब उसे गुरु जी कहते हैं। तिहाड़ जेल जाने के बाद ही उसे ये नाम मिला।’ उसकी फैमिली बहुत धार्मिक है। लॉरेंस घर में रहे या जेल में, धार्मिक ही होगा। वो रोज सुंदरकांड पढ़ता था। मंगलवार का उपवास भी करता था। आज भी सब करता है। उसका खान-पान भी बहुत सादा है। नॉनवेज नहीं खाता।‘
इन दावों पर हमने गुजरात में जेल विभाग के इंचार्ज DGP डॉ. केएलएन राव से बात की। उनका कहना है कि वे लॉरेंस के बारे में बात नहीं कर सकते। उसके बारे में बोलने की अथॉरिटी जेल सुपरिटेंडेंट गौरव अग्रवाल के पास है।
हमने कई बार जेल सुपरिटेंडेंट गौरव अग्रवाल को फोन लगाया, तब उनसे बात हुई। उन्होंने कहा कि लॉरेंस हाईप्रोफाइल कैदी है। हम उसके बारे में मीडिया को कोई जानकारी नहीं दे सकते।
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