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छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने निकाली टेट मुक्त रैली:TET की अनिवार्यता का विरोध, बोले- फेल हुए तो प्रमोशन और वेतन वृद्धि पर पड़ेगा असर




मनेन्द्रगढ़ में छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने मंगलवार को पांच सूत्रीय मांगों को लेकर ‘टेट मुक्त रैली’ निकाली। संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आयोजित रैली में जिलेभर से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव के नाम ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के निराकरण की मांग की। रैली की शुरुआत तहसील कार्यालय के पास स्थित धरना स्थल से हुई। शिक्षक रैली के रूप में पहले जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसके बाद रैली कलेक्टर कार्यालय पहुंची, जहां मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव के नाम ज्ञापन देकर मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की गई। 28 साल की सेवा, अब TET की शर्त का विरोध शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की। शिक्षकों का कहना है कि कई शिक्षक करीब 28 वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। नियुक्ति के समय टीईटी अनिवार्य नहीं थी, लेकिन अब साल 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने की शर्त लागू की जा रही है। फेल हुए तो प्रमोशन और वेतन वृद्धि पर असर शिक्षकों का कहना है कि टीईटी उत्तीर्ण नहीं करने की स्थिति में उनकी पदोन्नति और वेतन वृद्धि प्रभावित हो सकती है। इससे वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों में असमंजस और चिंता की स्थिति है। मोर्चा का तर्क है कि नियुक्ति के समय जो पात्रता और सेवा शर्तें लागू थीं, उन्हें वर्षों बाद बदलना उचित नहीं है। पुरानी सेवा अवधि को पेंशन में जोड़ने की मांग मोर्चा ने बताया कि बड़ी संख्या में शिक्षक बिना पर्याप्त पेंशन लाभ के सेवानिवृत्त हो रहे हैं। शिक्षकों के अनुसार साल 2018 से पहले की सेवा अवधि की गणना नहीं होने के कारण सेवानिवृत्ति के बाद कई शिक्षकों को महज 2 से 3 हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन मिल रही है। उन्होंने पूर्व की सेवा अवधि को पेंशन लाभ में शामिल करने की मांग की है। पांच सूत्रीय मांगों पर आंदोलन जारी रखने की चेतावनी रैली के दौरान शिक्षकों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि मांगों को लेकर सरकार से सहानुभूतिपूर्वक और न्यायसंगत निर्णय की अपेक्षा है। मांगों का समाधान नहीं होने पर पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रखा जाएगा।



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