जामताड़ा सदर अस्पताल में हंगामे के बाद डॉक्टर हड़ताल पर:प्रसूता की मौत पर अस्पताल में तोड़फोड़, भाजपा जिलाध्यक्ष समेत आठ पर FIR




जामताड़ा में 16 जुलाई को सदर अस्पताल में एक प्रसूता और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद हुए हंगामे और तोड़फोड़ के विरोध में शुक्रवार को स्वास्थ्यकर्मियों ने कार्य बहिष्कार किया। झारखंड मेडिकल एसोसिएशन के नेतृत्व में शुरू हुई इस हड़ताल को चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का भी समर्थन मिला। इसके चलते ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं, हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं। यह घटना गुरुवार को हुई थी, जब महुलडंगाल निवासी एक गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों और समर्थकों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए सदर अस्पताल में हंगामा और तोड़फोड़ की थी। इस दौरान सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया। इस घटना के बाद अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. दिनेश प्रसाद के आवेदन पर जामताड़ा थाना में कांड संख्या 100/26 दर्ज किया गया है। प्राथमिकी में सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, अस्पताल में तोड़फोड़ करने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत भाजपा जिलाध्यक्ष सुमित शरण सहित आठ लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। कई अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज नामजद आरोपितों में भाजपा जिला महामंत्री कमलेश मंडल, भाजपा युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष कुणाल सिंह, भाजपा नगर अध्यक्ष प्रदीप रावत, भाजपा युवा नेता आकाश साव, टिंकू साव, राज सोनकर और जामताड़ा नगर पंचायत वार्ड संख्या-7 के पार्षद बच्चू साव शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कई अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। कार्य बहिष्कार कर रहे चिकित्सकों ने दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विक्की माझी ने कहा कि भय के माहौल में डॉक्टर काम नहीं कर सकते और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, नेत्र रोग पदाधिकारी डॉ. अशोक चौधरी ने बताया कि चिकित्सकों के साथ ऐसी घटनां लगातार हो रही हैं। इसलिए प्रशासन को दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। हड़ताल की वजह से गर्भवती महिला को नहीं किया भर्ती इधर, हड़ताल के कारण मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार सुबह मोहनपुर से प्रसव पीड़ा से पीड़ित नौ माह की गर्भवती महिला को सदर अस्पताल लाया गया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि हड़ताल का हवाला देकर उसे भर्ती नहीं किया गया और दूसरे अस्पताल जाने की सलाह देकर वापस भेज दिया गया। हालांकि, इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।



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