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दिल्ली में हुए Gen Z (जेन-जी) आंदोलन के बाद युवाओं के मुद्दे राजनीतिक दलों की प्राथमिकता में आ गए हैं। मध्य प्रदेश में भी अगस्त से डॉ. मोहन यादव सरकार ने युवाओं पर फोकस बढ़ाया है। सरकार ने 2027 को ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसके तहत सरकारी नौकरियों, भर्तियों और युवा कल्याण योजनाओं को लेकर नया एजेंडा तैयार किया जा रहा है। एक्सपर्ट के मुताबिक, यह पहल प्रशासनिक सुधार के साथ 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले युवा वोटरों को साधने की रणनीति भी हो सकती है। इसके अलावा सरकार वर्तमान में चल रही योजनाओं का इम्पैक्ट ऑडिट भी कराने जा रही है। इसके लिए हाई लेवल कमेटी बनाई गई है। इसमें लाड़ली बहना जैसी योजना का भी इम्पैक्ट ऑडिट होगा। जेन-जी आंदोलन के बाद युवाओं के लिए सरकार का नया एजेंडा क्या है और क्यों है? पढ़िए रिपोर्ट… सरकारी नौकरी से आगे ‘पढ़ाई से उद्यमिता’ पर फोकस मोहन सरकार की रणनीति में युवाओं के रोजगार का फोकस सरकारी नौकरियों और भर्ती परीक्षाओं से आगे बढ़ाकर कौशल प्रशिक्षण, उद्योगों से जुड़ाव, अप्रेंटिसशिप, निजी क्षेत्र में प्लेसमेंट, स्वरोजगार और उद्यमिता तक किया जा रहा है। इसका लक्ष्य युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है। वर्तमान में सरकार के Gen Z को लेकर प्लान 1. 2027 को ‘युवा वर्ष’ बनाने का फैसला
2028 के विधानसभा चुनाव से एक साल पहले 2027 को ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। इसके तहत रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता और सामाजिक भागीदारी से जुड़े अभियान चलाए जाएंगे। 2. ‘युवा संगम’ को रोजगार से जोड़ना’
युवा संगम’ को संवाद और सम्मेलनों से आगे रोजगार, स्वरोजगार और अप्रेंटिसशिप से जोड़ने पर सरकार का फोकस है। 3. 27 हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार का दावा
जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री कार्यालय ने दावा किया कि सरकार ने 27 हजार से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं। यह आंकड़ा सरकार के युवा रोजगार अभियान के प्रमुख दावों में शामिल है। 4. ‘सीखो-कमाओ योजना’ पर जोर
18 से 29 वर्ष के मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए चल रही इस योजना में उद्योगों की जरूरत के मुताबिक ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग दी जा रही है। इसमें 12वीं, आईटीआई या उससे अधिक योग्यता वाले युवा शामिल हैं। सरकार का फोकस इस योजना पर इसलिए है क्योंकि यह प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ती है। 5. आठवीं के बाद ड्रॉपआउट रोकने के लिए ‘VEDA’ पहल
2026 में शुरू की गई VEDA (वोकेशनल एजुकेशन टू एड्रेस ड्रॉप आउट्स) पहल का उद्देश्य आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ना है। इसके साथ ओपन स्कूलिंग के जरिए उनकी पढ़ाई जारी रखने का विकल्प दिया जा रहा है। इससे स्कूल ड्रॉपआउट के साथ कौशल की कमी और बेरोजगारी की समस्या को कम करने पर फोकस है। 6. भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना
इस योजना के तहत राज्य के 102 मेधावी छात्र-छात्राओं को एक-एक लाख रुपये की छात्रवृत्ति देने का प्रस्ताव है। चयन में केवल परीक्षा के अंक ही नहीं, बल्कि कला, कौशल और बहुआयामी प्रतिभा (मल्टी डायमेंशनल टैलेंट) को भी आधार बनाया जाएगा। यूथ मॉडल को सिलसिलेवार समझिए 1. यूथ जॉब गारंटी ट्रैकर
भर्ती परीक्षाओं में देरी और गड़बड़ियों को कम करने के लिए सरकार डिजिटल ट्रैकर पोर्टल विकसित कर रही है। इसमें हर सरकारी भर्ती की पूरी टाइमलाइन वैकेंसी, विज्ञापन, परीक्षा, रिजल्ट और नियुक्ति की तारीख दर्ज होगी। युवा मोबाइल से भर्ती प्रक्रिया का स्टेटस देख सकेंगे। 2. ‘एक साल–एक लाख नियुक्ति’ मॉडल
हर साल सरकारी विभागों की वास्तविक रिक्तियों का एकीकृत कैलेंडर जारी किया जाएगा। इससे युवाओं को पहले से नियुक्तियों की संभावित संख्या और भर्ती का रोडमैप पता रहेगा, जिससे वे तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे। 3. 18-30 वर्ष के प्रत्येक युवा की डिजिटल प्रोफाइल
‘मेरा युवा मध्यप्रदेश’ पोर्टल को अपग्रेड कर 18 से 30 वर्ष के युवाओं की यूनिक डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जाएगी। इसमें शिक्षा, स्किल, अनुभव, नौकरी की तलाश, अप्रेंटिसशिप और संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। 4. ‘कॉलेज से करियर’ मिशन
रोजगार कार्यालयों की करियर गाइडेंस सेवाएं सीधे कॉलेजों तक पहुंचाई जाएंगी। हर सरकारी कॉलेज में अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए इसे अनिवार्य किया जाएगा। इसके तहत करियर काउंसलिंग, स्किल टेस्ट, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट की व्यवस्था होगी। 5. नया यूथ प्लान: पढ़ाई-स्किल-ट्रेनिंग-रोजगार-उद्यमिता
‘सीखो-कमाओ योजना’ के अगले चरण के रूप में यह 5-स्तरीय मॉडल तैयार किया जा रहा है। इसमें 18 से 29 वर्ष के 12वीं, आईटीआई या उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को पंजीकृत औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रावधान होगा। 6. आईटीआई और पॉलिटेक्निक का उद्योगों से सीधा जुड़ाव
डिग्री-डिप्लोमा धारकों की संख्या बढ़ने के बावजूद उद्योगों को कुशल मैनपावर की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसे दूर करने के लिए सरकार ‘कोर्स पहले, नौकरी बाद में’ के बजाय ‘नौकरी की जरूरत पहले, कोर्स उसके अनुसार’ मॉडल लागू करने की तैयारी में है। पुरानी योजनाओं के ‘इम्पैक्ट ऑडिट’ से बजट की समीक्षा युवा-केंद्रित योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के उद्देश्य से मोहन सरकार ने मौजूदा जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा के लिए छह विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की हाई-लेवल कमेटी बनाई है। समिति केवल कागजी प्रगति की समीक्षा नहीं करेगी, बल्कि यह भी आकलन करेगी कि योजनाओं पर खर्च सरकारी धन का जमीनी स्तर पर कितना असर हुआ। लाड़ली बहना योजना का भी होगा इम्पैक्ट ऑडिट ‘लाड़ली बहना योजना’ में अब केवल यह नहीं देखा जाएगा कि कितनी महिलाओं के खातों में राशि ट्रांसफर हुई। कमेटी यह भी आकलन करेगी कि आर्थिक मदद से महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, परिवार में निर्णय लेने की क्षमता और जीवन स्तर में कितना बदलाव आया। एक्सपर्ट बोले- अगले साल 8 राज्यों में चुनाव वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक एन के सिंह का कहना है कि कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद से ही युवा शक्ति सुर्खियों में है। न केवल बीजेपी, बल्कि दूसरी पार्टियां भी युवाओं पर फोकस कर रही हैं। अगले साल करीब 7-8 राज्यों में चुनाव है। दैनिक भास्कर की ही रिपोर्ट के मुताबिक इन राज्यों में 22 फीसदी युवा वोटर्स हैं। यदि 5 फीसदी भी इधर से उधर जाते हैं तो सरकार को खतरा हो सकता है। बीजेपी के साथ बाकी पार्टियों की चिंता स्वाभाविक है। वे कहते हैं कि बीजेपी के साथ कठिनाई ये है कि जब कोई घटना होती है, तब वो रिएक्ट करती है। इस आंदोलन को लेकर पहले उनके नेताओं का रिएक्शन अलग था। वो इसे विदेशी ताकतों का हाथ बता रहे थे। जब आरएसएस के मोहन भागवत ने इस पर रिएक्शन दिया, तो बीजेपी के नेताओं का रवैया ही बदल गया। वैसे जब चुनाव आते हैं, तो सारे राजनीतिक दलों का रवैया बदल जाता है।
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जॉब गारंटी ट्रैकर और 1 लाख नौकरियां:एमपी सरकार का नया यूथ प्लान; लाड़ली बहना योजना की होगी समीक्षा, बंद हो सकती हैं पुरानी योजनाएं
