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जोधपुर के भजन गायक रामचंद्र गोयल का निधन:स्कूल में भजन गाना शुरू किया था; आकाशवाणी में 26 सालों तक दी प्रस्तु​तियां




जोधपुर के भजन गायक रामचंद्र गोयल का 90 साल की उम्र में निधन हो गए। देश के महान भजन गायको में उनकी एक अलग ही पहचान थी। बताया जाता है कि जब उनकी मां पूजा-पाठ के दौरान भजन गाते थे तो उन्हें भी इसकी प्रेरणा मिली। सबसे पहले स्कूल में भजन गायन शुरू किया। बाद में कड़ी मेहनत तथा साधना से उन्होंने देश सबसे बेहतर भजन गायकों में अपना स्थान बना लिया। सोमवार सुबह 10 बजे कागा स्थिति पीपा क्षत्रिय समाज के श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे लक्ष्मीकांत गोयल ने मुखाग्नि दी। मथानिया गांव में हुआ था जन्म जोधपुर के पावटा, पोलो में रहने वाले स्वर्गीय रामचंद्र गोयल का जन्म जोधपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर मथानियां गांव में 2 नवंबर 1936 को पीपा क्षत्रिय समाज के एक साधारण परिवार में हुआ। पिताजी सिलाई का काम करते थे। छह भाई-बहनों में वे सबसे छोटे थे। अपनी प्रारम्भिक शिक्षा गांव में पूरी करने के बाद जोधपुर में आ गए। इस दौरान बिजली विभाग में बाबू की नौकरी की। इसके साथ ही सुबह-शाम भक्ति संगीत की साधना में लगे रहे। तड़के चार बजे उठ कर संगीत की साधना में जुट जाते। धीरे-धीरे भक्ति संगीत के क्षेत्र में इन्होंने देश-विदेश में अपनी अलग ही पहचान बना ली। आकाशवाणी जयपुर में लगभग 18 वर्ष तथा आकाशवाणी जोधपुर में लगभग 26 वर्षों तक भजनों की प्रस्तुतियां दीं। साल 1982 में दूरदर्शन के उपग्रह (सैटेलाइट) प्रसारण में उनकी प्रस्तुति हुई। इसके अलावा दूरदर्शन जयपुर, सीपीसी नई दिल्ली तथा जैन चैनल पर भी उनके भजनों का प्रसारण हुआ। वर्ष 1997 में सीपीसी नई दिल्ली से भी दो बार प्रस्तुति प्रसारित हुई। देश की कई कैसेट्स कंपनियों ने इनके भजनों के कैसेट्स बनाए। उन्होंने 1965 से लेकर 2009 तक लगातार जयपुर व जोधपुर आकाशवाणी के माध्यम से राजस्थानी, हिन्दी में भक्ति संगीत कार्यक्रमों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। हैलियां ने खूब दिलाई प्रसिद्धि गोयल की ओर से गाई हैलियां ने स्वर्गीय गोयल को खूब प्रसिद्धि ​दिलाई। लोकदेवता बाबा रामदेव, संत तुलसी दास, सूरदास, मीरा बाई, कबीरदास, भक्त रैदास, संत पीपा आदि जैसे महान संतों की भक्ति रचनाओं को अपने गायन में शामिल किया। मेहरानगढ़ ट्रस्ट द्वारा प्रसारित जोधपुर के पूर्व महाराजा मानसिंह के भजनों की तीन कैसेट में भी उन्हें स्वर दिया। कई वर्षों तक स्वामी रामसुखदास महाराज के सान्निध्य में भजन गाने का अवसर मिला। वे करीब 100 भजन लिख चुके थे। श्रीपीपा प्रकाश मासिक पत्रिका के संस्थापक सदस्य थे।



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