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जोधपुर हाईकोर्ट ने पैरोल नियमों पर लिया स्वत: संज्ञान:महिला कैदी की जेल में हुई थी मौत; राज्य के पैरोल नियमों की न्यायिक समीक्षा शुरू




राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने एक गंभीर रूप से बीमार महिला कैदी को आपातकालीन पैरोल न मिलने और जेल में ही उसकी मौत होने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने राज्य के पैरोल नियमों की न्यायिक समीक्षा शुरू कर दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने के निर्देश दिए। खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि संबंधित जिला मजिस्ट्रेट की असंवेदनशीलता और पैरोल नियमों की संकीर्ण व्याख्या के कारण गंभीर रूप से बीमार कैदी को राहत नहीं मिल सकी। यह मामला बीकानेर केंद्रीय कारागार में बंद मंजू देवी (57) से संबंधित है। 40 दिन की इमरजेंसी पैरोल के लिए दायर की थी याचिका मंजू देवी के पुत्र रविकांत स्वामी ने 40 दिन की आपातकालीन पैरोल के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया था कि मंजू देवी हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी और मधुमेह सहित कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थीं और आईसीयू में भी भर्ती रह चुकी थीं। जिला मजिस्ट्रेट बीकानेर ने 16 जून 2026 को उनका पैरोल आवेदन खारिज कर दिया था। सुनवाई के दौरान अदालत को सूचित किया गया कि मंजू देवी का बीमारी के कारण जेल में ही निधन हो चुका है। इस पर खंडपीठ ने पैरोल याचिका को समाप्त मानते हुए निस्तारित कर दिया। अगली सुनवाई 19 अगस्त को कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स-2021 की समीक्षा की मांग करता है। अदालत ने विशेष रूप से नियम 11(1)(i) पर विचार करने के लिए स्वत: संज्ञान याचिका दर्ज करने के निर्देश दिए। वर्तमान नियम गंभीर बीमारी पर पैरोल का प्रावधान करता है, लेकिन खुद कैदी की गंभीर बीमारी के मामले में स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। हाईकोर्ट ने अधिवक्ता संभावी मरर्डिया को न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किया है। इस याचिका पर अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी।



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