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ज्योति हत्याकांड: पीयूष, रेनू-सोनू की उम्रकैद की सजा बरकरार:कानपुर में पिता बोले- इंसाफ के लिए 12 साल से लड़ रहा हूं; मनीषा माखीजा बरी




कानपुर के चर्चित ज्योति हत्याकांड में सजायाफ्ता पीयूष श्यामदासानी समेत तीन अन्य अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए सभी अपीलों को खारिज कर दिया है। इसके बाद पीयूष, सुपारी किलर रेनू और सोनू की उम्रकैद की सजा बरकरार रहेगी, जबकि मनीषा को सजा से बरी कर दिया गया है। बता दें कि हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए पीयूष को हत्याकांड का मास्टरमाइंड, जबकि रेनू और सोनू को कांट्रैक्ट किलर बताया था। वहीं ज्योति के पिता शंकर नागदेव ने कहा- बेटी के इंसाफ के लिए 12 साल से लड़ रहा हूं। पांच हत्यारों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संतुष्ट हूं लेकिन मनीषा को बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ एक अंतिम कोशिश और करूंगा। जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी। बेटी की हत्या का मुख्य कारण मनीषा ही है। इसे भी जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए। उसके लिए कोई कसर नहीं छोड़ूंगा। 27 जुलाई 2014 को हुई थी ज्योति की हत्या
पांडुनगर निवासी बिस्कुट व्यापारी ओमप्रकाश श्यामदासानी की बहू ज्योति श्यामदासानी की 27 जुलाई 2014 को संदिग्ध हालात में हत्या हो गई थी। ज्योति के पति पीयूष ने स्वरूप नगर थाने जाकर ज्योति के अपहरण की कहानी सुनाई थी। लगभग 2 घंटे बाद पनकी में ज्योति का खून से लथपथ शव मिला था। ज्योति की हत्या के लिए चार लोगों को सुपारी दी थी ज्योति की हत्या 27 जुलाई 2014 को हुई थी। पुलिस को पहले पति ने ज्योति के अपहरण और लूट के लिए हत्या की बात बताई थी। हालांकि पुलिस ने जांच शुरू की तो मामला पलट गया। पति पीयूष को गिरफ्तार किया गया तो हाईप्रोफाइल केस खुल गया। पुलिस की पूछताछ में पति ने स्वीकार किया था कि ज्योति की हत्या के लिए चार लोगों को सुपारी दी थी। उनसे कहा था कि तब तक चाकू मारते रहना जब तक सांस न उखड़ जाए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ज्योति के शरीर पर 17 बार चाकू से घाव की पुष्टि हुई थी। 4 पेट में, 4 गर्दन पर, 2 सिर के पिछले हिस्‍से, 4 पैर और 2 पीछे हिप में चाकू के घाव मिले थे। पत्नी जैसी हूं..डायरी में बयां किया दर्द साल 2012 में ज्योति और पीयूष की अरेंज मैरिज हुई थी। दुल्हन बन ससुराल पहुंची ज्योति को सुहागरात को ही पति की असलियत पता चल गई। वह रातभर इंतजार करती रही और पीयूष अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रहा। ज्योति ने अपने इस दर्द को अपनी पर्सनल डायरी में बयां किया था। ज्योति ने यह भी लिखा कि मैं पत्नी नहीं, पत्नी जैसी हूं। अक्टूबर 2022 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी पुलिस ने इस मामले में पीयूष श्यामदसानी, पान मसाला कारोबारी की बेटी मनीषा मखीजा, ड्राइवर अवधेश, रेनू उर्फ अखिलेश, सोनू और आशीष कश्यप को गिरफ्तार किया था। कानपुर की सेशन कोर्ट ने इस मामले में 20 अक्टूबर 2022 पीयूष समेत अन्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनायी थी। कोर्ट के आदेश के खिलाफ सजा पाए सभी 6 दोषियों ने हाईकोर्ट में आदेश को चुनौती दी थी। 29 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट ने अपील पर निर्णय देते हुए छह में पांच दोषियों की सजा को बरकरार रखा, जबकि मनीषा मखीजा को संदेह का लाभ देते हुए निर्दोष करार दिया था। पीयूष समेत कांट्रैक्ट किलर ने दी थी फैसले को चुनौती तीन आरोपियों पीयूष, रेनू उर्फ अखिलेश, सोनू ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद से तीनों जेल में बंद हैं। वहीं, मनीषा को दोषमुक्त करार दिए जाने के हाईकोर्ट के आदेश को प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन चारों अपीलों का एक साथ निस्तारण कर दिया है। पीयूष समेत तीनों की सजा बरकरार रखी है। वहीं मनीषा को पर्याप्त सबूत न होने के आधार पर उसकी दोषमुक्ति को भी बरकरार रखा है।



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