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सीवान का मॉडल सदर अस्पताल मरीजों के लिए राहत की जगह मुसीबत बनता जा रहा है। अस्पताल में रात के समय इमरजेंसी में आने वाले सड़क दुर्घटना, मारपीट और अन्य गंभीर मरीजों को सरकारी इलाज देने के बजाय निजी नर्सिंग होम भेजने का खेल लगातार सामने आ रहा है। इस पूरे मामले को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित होने के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, बल्कि अस्पताल की सच्चाई उजागर करने वाले पत्रकारों को ही निशाना बनाया जाने लगा है। दैनिक भास्कर के पिछले कई दिनों से प्रकाशित खबरों और उपलब्ध साक्ष्यों में यह सामने आया कि रात की ड्यूटी के दौरान इमरजेंसी में तैनात कुछ चिकित्सकों की मौजूदगी में निजी एंबुलेंस चालक, दलाल और निजी नर्सिंग होम से जुड़े लोग अस्पताल परिसर में सक्रिय रहते हैं। सामान्य मरीजों को भी गंभीर बताकर उनके परिजनों को डराया जाता है कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराया तो मरीज की जान नहीं बचेगी। इसके बाद निजी एंबुलेंस से उन्हें निजी अस्पताल भेज दिया जाता है। शिकायत मिलने के बाद भी नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई इन मामलों में सबसे अधिक शिकायतें एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. सर्फुद्दीन को लेकर सामने आई हैं। बीते 13 दिसंबर को भी मरीज के परिजनों ने साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। जांच टीम ने उन्हें दोषी मानते हुए कार्रवाई की अनुशंसा भी की थी, लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। केवल छोटे स्तर के आठ कर्मियों पर कार्रवाई कर मामले की औपचारिकता पूरी कर दी गई, जबकि डॉ. सर्फुद्दीन लगातार इमरजेंसी ड्यूटी करते रहे। पत्रकार के साथ डॉक्टर ने किया अभद्र व्यवहार शुक्रवार की रात नवतन थाना क्षेत्र के सुरवानिया गांव के समीप सड़क दुर्घटना में गोपालगंज जिले के भोरे थाना क्षेत्र के सिसई उत्तर टोला निवासी विनीत कुमार खरवार(20) की मौत के बाद दैनिक भास्कर का संवाददाता समाचार संकलन के लिए सदर अस्पताल पहुंचा था। आरोप है कि डॉ. सर्फुद्दीन संवाददाता को देखते ही आगबबूला हो गए और अभद्र व्यवहार करते हुए बाहर निकलने को कहने लगे। उन्होंने सदर अस्पताल पुलिस पिकेट प्रभारी सब इंस्पेक्टर सुजीत कुमार से भी पत्रकार को बाहर कराने की बात कही। जब पत्रकार ने पूछा कि क्या अब सदर अस्पताल में मीडिया के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, तो डॉक्टर कैमरे के सामने भी अनाप-शनाप बोलने लगे। पूरी रात इमरजेंसी के बाहर पड़ा रहा शव इसी बीच एक बार फिर डॉ. सर्फुद्दीन की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई। प्रतिदिन की तरह शुक्रवार की रात भी वे करीब 12 बजे के बाद इमरजेंसी छोड़कर गायब हो गए और पूरी रात वापस नहीं लौटे। इसका सीधा असर सड़क दुर्घटना में मृत युवक के पोस्टमॉर्टम पर पड़ा। मृतक का शव पूरी रात इमरजेंसी के बाहर पड़ा रहा और पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका। मृतक के परिजन का कहना था कि उन्होंने कई बार डॉक्टर को बुलाने और पोस्टमॉर्टम कराने का अनुरोध किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। व्यवस्था से परेशान परिजन अस्पताल परिसर में ही रोते-बिलखते रहे। पूरी रात इमरजेंसी वार्ड केवल इंटर्न और आयुष चिकित्सकों के भरोसे चलता रहा। शनिवार की अहले सुबह पचरुखी थाना क्षेत्र के पूरब टोला निवासी 55 वर्षीय चन्देश्वर चौहान को सांप काटने के बाद गंभीर अवस्था में सदर अस्पताल लाया गया। उस समय भी डॉ. सर्फुद्दीन इमरजेंसी से नदारद थे। इंटर्न और आयुष चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन मरीज की मौत हो गई। आरोप है कि इसके बाद नर्सिंग कर्मियों ने फोन कर डॉ. सर्फुद्दीन को बुलाया और वे सुबह करीब छह बजे अस्पताल पहुंचे। इसके बाद औपचारिकता पूरी करते हुए मरीज को मृत घोषित किया गया। ड्यूटी के दौरान निजी नर्सिंग होम चले जाते है डॉक्टर इससे पहले भी कई बार साक्ष्यों के साथ यह सामने आ चुका है कि डॉ. सर्फुद्दीन रोस्टर के अनुसार इमरजेंसी ड्यूटी पर रहने के बावजूद पूरे समय अस्पताल में मौजूद नहीं रहते और ड्यूटी के दौरान ही अपने निजी नर्सिंग होम चले जाते हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है। सदर अस्पताल में लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद मरीजों की सुविधा के लिए इमरजेंसी के वेटिंग एरिया में सरकारी एंबुलेंस हेल्पडेस्क बनाया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों में उसे भी समाप्त कर दिया गया। वहीं पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा की पहल पर अस्पताल परिसर में स्थापित टीओपी भी दलालों पर प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम दिखाई दे रही है। मरीजों के परिजनों द्वारा पकड़े गए दलालों को भी कार्रवाई के बजाय छोड़ दिए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
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डॉ. सर्फुद्दीन ने पत्रकार से किया अभद्रता:सीवान सदर अस्पताल से मरीज को निजी अस्पताल करते है रेफर, लापरवाही के कारण पेसेंट की मौत
