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जिला प्रशासन तरनतारन द्वारा पराली (धान के अवशेष) न जलाने और उसके सही प्रबंधन के लिए जिले भर में व्यापक जागरुकता अभियान शुरू किया गया है। इसी कड़ी में उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) पट्टी अमनदीप की अध्यक्षता में गांव शहीद और घरियाला में विशेष किसान बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों में कृषि और राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों सहित गांव की पंचायतों और किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। बैठक के दौरान एसडीएम अमनदीप और ब्लॉक कृषि अधिकारी डॉ. भूपिंदर सिंह ने किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसानों और इसके इन-सिटू (In-situ) प्रबंधन के फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि पराली को खेतों में ही जोतने या मिलाने से जमीन की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है और मिट्टी में जैविक खाद का इजाफा होता है। इससे फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे रासायनिक खादों की खपत घटती है और फसल की पैदावार में बढ़ोतरी होती है। एनजीटी के निर्देशों का सख्ती से पालन करने की हिदायत एसडीएम पट्टी ने सरपंचों और किसानों को संबोधित करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त दिशा-निर्देशों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रशासन किसानों की मदद के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली को आग लगाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करें। प्रशासन, पंचायत और किसानों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर बैठक के अंत में एसडीएम ने कहा कि पराली की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब किसान, ग्राम पंचायतें और संबंधित प्रशासनिक विभाग आपसी तालमेल के साथ काम करें। उन्होंने पंचायतों को गांव-गांव में मुनादी करवाने और किसानों को पराली प्रबंधन उपकरण मुहैया कराने में सहयोग करने का निर्देश दिया।
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तरनतारन में पराली प्रबंधन पर जागरुकता अभियान:पट्टी में किसानों के साथ बैठक, पराली जलाने के बजाय खेतों में प्रबंधन के बताए फायदे
