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इंदौर में हुए छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी देवास के अर्पित जाज के परिवार से मिले। इस दौरान अर्पित के दादा, पिता भूपेंद्र जाज और बहन भी मौजूद थे। अर्पित की दिल्ली में एक पीजी इमारत हादसे में जान चली गई थी। मुलाकात के दौरान अर्पित के दादा ने बताया कि दिल्ली में 12 घंटे तक बच्चे को ढूंढते रहे, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि उनका पोता पढ़ने के लिए दिल्ली गया था। मंच पर अर्पित के पिता भूपेंद्र जाज के हाथ में बेटे की तस्वीर थी। राहुल गांधी ने तस्वीर हाथ में लेकर पूछा, यह था आपका बच्चा? दादा ने जवाब दिया कि यह उनका पोता है। उन्होंने कहा मेरा बेटा तो मेरा ख्याल रखेगा, लेकिन उसका कौन करेगा? उसका तो बेटा नहीं बचा। दादा ने सज्जन सिंह वर्मा और मोहन राजानी का आभार जताया कि उनकी मदद से वे राहुल गांधी तक पहुंच पाए। इस दौरान अर्पित की बड़ी बहन प्रियांशी ने सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि निर्दोष लोगों की जान जा रही है। महंगाई के बाद भी बच्चों को पीजी भेजते हैं
प्रियांशी ने पूछा कि उनके भाई की क्या गलती थी जो वह वहां रह रहा था। उन्होंने बताया कि पीजी महंगे होते हैं, फिर भी मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों को वहां पढ़ाते हैं ताकि वे अपने सपने पूरे कर सकें। पिता ने राहुल गांधी से कहा कि उन्होंने बड़ी मुश्किल से बेटे को वहां पढ़ने भेजा था, लेकिन उन्हें सिर्फ उसकी डेड बॉडी मिली। राहुल गांधी ने अर्पित की बहन प्रियांशी से पूछा कि वह क्या करना चाहती है, जिस पर प्रियांशी ने बताया कि वह सीए करना चाहती है। मेरे बच्चे को मिसिंग में डाल दिया था, कई घंटे बाद शव बताया
पिता भूपेंद्र जाज ने कहा कि आज तक दिल्ली से कोई खबर हमारे पास नहीं आई। बहन ने कहा कि घटना को तेराह दिन हो गई, लेकिन कोई एक्सन नहीं लिया गया। इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि अच्छी सुविधा होती तो यह कभी नहीं होता। बजट कटता नहीं तो यह नहीं होता, इनके लिए हॉस्टल होता। रहने की जगह होता, सेफ जगह होती। राहुल गांधी ने अर्पित के परिवार से कहा कि आपने तो कभी सोचा नहीं होगा, कि ऐसा होगा। हमको दिल्ली से खबर नहीं आई, उसके दोस्त ने कहा कि पीजी गिर गया है। राहुल गांधी ने पूछा हादसे के बाद आप कैसे गई। जिस पर पिता ने बताया कि हम मुश्किल से फ्लाइट से गए। पिता ने कहा कि हम रात में दस बजे पहुंचे। अगले दिन सुबह बेटा का पता चला, जबकि उसे हादसे वाले दिन शाम को छह बजे निकाल लिया गया था। आज तक दिल्ली से किसी ने हम से कुछ नहीं पूछा। पिता की आंखू में आए तो राहुल गांधी ने लगाया गले। राहुल गांधी ने कहा कि हम कुछ कर सकते हैं तो बताओ। इसलिए हम यह प्रोग्राम कर रहे हैं। ऐसा ना हो। हमारा चिराग तो बुझ गया।
हमारे परिवार डेड बॉडी के बारे में नहीं बताया जा रहा था। डेड बॉडी छुपाई जा रही थी। मिसिंग करने की कोशिश कर रहे थे हमारे बच्चे को। डॉक्टर ने उसे पैतीस वर्ष का बताकर मिसिंग में डाल दिया था। हम कोशिश नहीं करते तो बच्चा नहीं मिलता। बड़ी मुश्किल से मिला। राहुल गांधी ने कहा कि मुझे बता दीजिए मैं कर सकता हूं करूंगा।
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दिल्ली पीजी में मृत अर्पित के परिवार से मिले राहुल:दादा बोले- मेरे बेटे का ख्याल कौन रखेगा; पिता ने सुनाई दुख भरी कहानी
