Headlines

धमतरी में वाल्मीकि समाज ने निकाली भोजली शोभायात्रा:गुरु गोरखनाथ और जहरवीर गोगा की छड़ी का हुआ भ्रमण, आशीर्वाद लेने उमड़े श्रद्धालु




छत्तीसगढ़ के धमतरी में वाल्मीकि समाज द्वारा भव्य भोजली शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस दौरान गुरु गोरखनाथ और जाहरवीर गोगा जी की पूजा-अर्चना कर उनकी 15 फीट लंबी छड़ी को शहर में भ्रमण कराया गया। शोभायात्रा में सेवादारों ने हर साल की तरह इस बार भी 15 फीट लंबी छड़ी को अपने नाभि के पास कपड़े से बने डप में उठाकर शहर में भ्रमण कराया। इस दौरान श्रद्धालु जमीन पर लेटकर आशीर्वाद प्राप्त करते दिखे, वहीं समाज के लोग बाजे की धुन पर थिरकते नजर आए। शोभायात्रा में वाल्मीकि समाज के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी सदस्य शामिल हुए। शहर के नागरिक भी इस आयोजन में बड़ी संख्या में पहुंचे। गोगा नवमी पर निकलती है शोभायात्रा वाल्मीकि समाज में यह त्योहार सावन माह की नाग पंचमी से शुरू होता है। नाग पंचमी के दिन भोजली को विधि-विधान से स्थापित किया जाता है, जिसका विसर्जन भादों माह में होता है। इस अवसर पर वाल्मीकि समाज की बहु-बेटियां अपने मायके आती हैं और दूर-दूर से मेहमान भी शामिल होते हैं। समाज के लोगों ने बताया कि नाग पंचमी से लेकर गोगा नवमी तक समाज में काफी उत्साह रहता है। गोगा नवमी, जो रक्षाबंधन के दूसरे दिन पड़ती है, उस रात देर से भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। इस शोभायात्रा में वाल्मीकि समाज के गोरखनाथ मंदिर के सेवादार अपने नाभि के पास कपड़े से डप बनाकर 15 फीट लंबे गोरखनाथ जाहरवीर गोगा जी के निशान को उठाते हैं। नाग पंचमी पर होती है निशान साहेब की स्थापना निशान साहेब की स्थापना भी नाग पंचमी के दिन ही की जाती है, जिसके दर्शन के लिए गांव-गांव और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी इच्छानुसार फल चढ़ाते हैं। समाज के सदस्यों ने यह भी बताया कि बाबा गोरखनाथ का प्रमुख मंदिर उत्तर प्रदेश के बागड़ में है, जहां से बुजुर्गों द्वारा छड़ी लाकर यहां स्थापित की गई थी, और यह परंपरा आज भी जारी है। शोभायात्रा में आसपास के वाल्मीकि समाज के सदस्यों के साथ-साथ शहर के गणमान्य नागरिक और अन्य श्रद्धालु भी शामिल होते हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *