धर्मशाला बस स्टैंड के ऊपर भारी भूस्खलन:सुरक्षा दीवार ढही, सड़कों में कटाव, मकानों, दुकानों और सरकारी भवनों की नींव को खतरा




कांगड़ा जिले के धर्मशाला में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बन रहे बहुप्रतीक्षित नए बस स्टैंड की साइट पर एक बार फिर कुदरत का कहर बरपा है। बस स्टैंड साइट के ठीक ऊपर स्थित पहाड़ी में हुए भारी भूस्खलन के कारण सुरक्षा के लिए बनाया गया भारी-भरकम ‘रिटेनिंग डंगा’ (सुरक्षा दीवार) ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस घटना ने जहाँ एक ओर प्रोजेक्ट के भविष्य पर संकट गहरा दिया है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रहे भू-कटाव और पहाड़ी से नीचे की तरफ खिसक रहे मलबे के कारण अब ऊपरी हिस्से में स्थित संपत्तियों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। भूस्खलन के चलते ऊपर से गुजरने वाली मुख्य सड़क धंसने की कगार पर है। आसपास बने निजी आवासीय मकानों और सरकारी भवनों को खतरा पैदा हो गया है। नगर निगम की दुकानों की नींव भी मलबे के खिसकने के कारण असुरक्षित हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार यदि क्षेत्र में बारिश का दौर इसी तरह जारी रहता है, तो स्थिति और ज्यादा भयावह हो सकती है। एक दशक से अधर में है यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट धर्मशाला में आधुनिक अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल (ISBT) बनाने की योजना करीब 2014-15 में तैयार हुई थी। लगभग एक दशक (11-12 वर्ष) का लंबा समय बीत जाने के बावजूद यह महत्वाकांक्षी परियोजना आज तक पूरी नहीं हो सकी है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड के तहत बनने वाले इस प्रोजेक्ट में निजी डेवलपर के साथ विवाद, वित्तीय संकट और कानूनी अड़चनों के कारण काम लंबे समय से ठप पड़ा है। आज यह बस टर्मिनल एक अधूरे ढांचे और खिसकती पहाड़ी के बीच फंसकर रह गया है। 2021 और 2023 की आपदाओं से भी नहीं लिया सबक इस पहाड़ी हिस्से में भूस्खलन का यह कोई पहला मामला नहीं है। जुलाई 2021 में भागसूनाग और धर्मशाला में आई विनाशकारी बाढ़ व बादल फटने की घटना के बाद पहली बार इस पहाड़ी में दरारें और भू-कटाव देखा गया था। पिछले साल के मानसून में भी यहां बड़े पैमाने पर लैंडस्लाइड हुआ था। ड्रेनेज सिस्टम सही न होने से बढ़ी परेशानी लगातार बढ़ते भूगर्भीय दबाव और पानी की निकासी की सही व्यवस्था न होने के कारण यह पहाड़ी लगातार कमजोर होती गई। इस खतरे को रोकने के लिए जो सुरक्षा दीवार (डंगा) लगाई गई थी, वह भी इस बार के दबाव को झेल नहीं पाई और जमींदोज हो गई। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तुरंत युद्धस्तर पर सुरक्षा उपाय करने की मांग की है।

पैचवर्क से नहीं रुकेगा पहाड़ी का खिसकना
स्थानीय लोगों और व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से अब तक स्थायी समाधान के बजाय अस्थायी उपायों पर ही जोर दिया गया। उनका कहना है कि केवल मलबा हटाने, तिरपाल लगाने या टूटे हिस्सों पर पैचवर्क करने से खतरा खत्म नहीं होगा।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे क्षेत्र का विशेषज्ञों से जियोलॉजिकल और जियोटेक्निकल सर्वे करवाया जाए। पहाड़ी की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के बाद मजबूत कंक्रीट रिटेनिंग वॉल, रॉक एंकरिंग और प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया जाए, ताकि बारिश का पानी पहाड़ी के भीतर न जाए।
सड़क के साथ भवनों पर भी खतरा
भूस्खलन वाले हिस्से के ऊपर से गुजरने वाली सड़क की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। पहाड़ी का कटाव इसी तरह जारी रहा तो सड़क के हिस्से के कमजोर होने की आशंका है। इसके अलावा नीचे और आसपास स्थित भवनों तथा नगर निगम की दुकानों की नींव तक मलबा और पानी पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते वैज्ञानिक तरीके से स्थायी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो अगली बड़ी बारिश के दौरान यह क्षेत्र बड़े हादसे की चपेट में आ सकता है। एक दशक से बस स्टैंड का इंतजार कर रही धर्मशाला की जनता के सामने अब सवाल सिर्फ प्रोजेक्ट पूरा होने का नहीं, बल्कि अधूरी परियोजना की साइट को सुरक्षित करने का भी है।



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