![]()
अंबाला के धूलकोट में 27 सितंबर को हुए निर्माणाधीन बिल्डिंग हादसे में मृतकों की संख्या अब 7 हो गई है। हादसे में घायल 57 साल के अशोक कुमार ने बुधवार यानी 30 सितंबर को चंडीगढ़ PGI में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनकी हालत गंभीर होने के बाद उन्हें अंबाला सिटी के सिविल अस्पताल से चंडीगढ़ PGI रेफर किया गया था। अशोक कुमार बिहार के पटना जिले के मोकामा के रहने वाले थे और पिछले करीब 35 साल से अंबाला के बलदेव नगर में रह रहे थे। अशोक कुमार हादसे के बाद अंबाला सिटी के सिविल अस्पताल में भर्ती थे। उसी दौरान भास्कर रिपोर्टर ने उनसे बातचीत की थी। उस वक्त उन्होंने हादसे के बारे में बताया था कि वह निर्माणाधीन बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर मिस्त्री के तौर पर काम कर रहे थे। ऊपर से शटरिंग और लेंटर गिरने लगा तो उन्होंने भागने की कोशिश की, लेकिन इसके बाद वह मलबे की चपेट में आ गए। ‘लेंटर गिरा तो भागना शुरू किया, फिर मैं आगे गिर गया’ अशोक कुमार ने भास्कर को बताया था कि हादसे के समय वह सबसे नीचे ग्राउंड फ्लोर पर थे। ऊपर से मलबा और लेंटर गिरने लगा तो उन्होंने भागना शुरू किया। उन्होंने कहा था- “भागे फिर… फिर मैं आगे गिर ही गया।” इसके बाद मलबा उनके ऊपर गिर गया और वह दब गए। उन्होंने बताया था कि उनके साथ तीन अन्य लोग भी काम कर रहे थे। हादसे के बाद वह खुद बेहोश हो गए थे। साथ में मौजूद अशोक की पत्नी ने बताया था कि अशोक को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था और उन्हें काफी देर तक यह भी पता नहीं था कि वह कहां हैं। 6 महीने से चल रहा था निर्माण कार्य अशोक कुमार ने बताया था कि बिल्डिंग में करीब 6 महीने से काम चल रहा था। बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या एक छत सूखने से पहले ही दूसरी छत डाल दी जाती थी, तो उन्होंने कहा था कि “सूखने का तो टाइम मिलता है।” उन्होंने बताया था कि हादसे के वक्त ऊपर का लेंटर गिरा था। बिल्डिंग की दीवार की मजबूती के बारे में पूछे जाने पर अशोक ने बताया था कि दीवार करीब 4 इंच की थी, जबकि पिलर करीब 9 इंच का था। उन्होंने यह भी कहा था कि बिल्डिंग में पिलर और बीम मौजूद थे और वह इसे कमजोर नहीं मानते थे। परिवार ने इलाज और आर्थिक मदद की मांग की थी अस्पताल में अशोक कुमार के साथ मौजूद उनकी बेटी विनीता ने भास्कर से बातचीत में उनके इलाज का खर्च उठाने और परिवार की आर्थिक मदद करने की मांग की थी। उन्होंने बताया था कि परिवार में 5-6 बच्चे हैं। विनीता ने कहा था कि अशोक के कई दिनों तक काम नहीं कर पाने की स्थिति में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होगा। 27 सितंबर को हुआ था हादसा धूलकोट में यह हादसा 27 सितंबर की दोपहर 3 बजे हुआ था। निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत में तीसरी मंजिल का लेंटर डालने का काम चल रहा था, तभी इमारत का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया। हादसे के बाद मलबे में कई मजदूर दब गए थे। पुलिस, दमकल, NDRF और SDRF की टीमों ने करीब 15 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला। शुरुआती तौर पर चार मौतों की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद मलबे से दो और शव मिलने पर मृतकों की संख्या छह हो गई थी। अब अशोक कुमार की PGI में मौत के बाद हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या 7 हो गई है।
Source link
धूलकोट बिल्डिंग हादसे में 7वीं मौत:चंडीगढ़ PGI में अशोक ने तोड़ा दम, भास्कर को बताया था हादसे का हाल
