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नक्सल पीड़ितों के घर पहुंचे डॉ. प्रेमा साईं:जरूरत के सामान दिए, नक्सल हिंसा पीड़ित की बेटी की शादी का उठाएंगे खर्च




बस्तर के अंदरूनी और दुर्गम इलाकों में पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साईं महाराज नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे। पामेड़ से लेकर नेलाकांकेर तक उन्होंने चार पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी स्थिति जानी और आर्थिक सहायता के साथ कपड़े और शैक्षणिक सामग्री वितरित की। ग्राम यमपुर में डॉ. प्रेमा साईं ने साल 2025 में नक्सल हिंसा में मारे गए सुन्नम सम्मैया और वेक्को संदीप के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने सुन्नम सम्मैया की पत्नी नर्सम्मा और उनके दो छोटे बच्चों से बातचीत कर परिवार की स्थिति जानी। वहीं वेक्को संदीप की पत्नी आरती और उनके 9 वर्षीय बेटे से भी मुलाकात की। दोनों परिवारों को उन्होंने 21-21 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी। महिलाओं को साड़ी और बच्चों को कपड़े, कॉपी, पेन, कंपास बॉक्स व चप्पल वितरित की गईं। ग्रामीणों को दिव्य कवच और भभूति भी दी गई। ग्रामीणों के साथ बैठकर किया भोजन दुर्गम रास्तों की मुश्किलों के बीच यमपुर पहुंचे डॉ. प्रेमा साईं ने ग्रामीणों के बीच समय बिताया। उन्होंने उनके साथ बैठकर भोजन किया और उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद वे नेलाकांकेर पहुंचे, जहां ग्रामीणों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। यहां उन्होंने साल 2026 में नक्सल हिंसा में मारे गए तिरुपति सोढ़ी के परिवार से मुलाकात की। पत्नी शांति और पांच बच्चों वाले परिवार की स्थिति जानने के बाद उन्होंने 31 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी और भविष्य में भी हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। बेटी की शादी का पूरा खर्च उठाने की घोषणा तिरुपति सोढ़ी के परिवार से मुलाकात के दौरान डॉ. प्रेमा साईं ने उनकी बेटी संध्या की शादी को लेकर बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि संध्या की शादी का पूरा खर्च वे स्वयं उठाएंगे और कन्यादान भी करेंगे। पीड़ित परिवार के लिए यह मदद केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि परिवार की एक बड़ी जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेने का संदेश भी दिया। इकलौते बेटे को खो चुके परिवार से मिले नेलाकांकेर में डॉ. प्रेमा साईं ने रवि कट्टम (23) के परिवार से भी मुलाकात की। रवि की साल 2026 में नक्सल हिंसा में मौत हुई थी। वह अपने परिवार की इकलौती संतान थे। परिवार की स्थिति जानने के बाद उन्होंने 31 हजार रुपए की सहयोग राशि दी और आगे भी मदद करने का भरोसा दिलाया।
बोले- पीड़ित परिवारों को एहसास होना चाहिए कि वे अकेले नहीं डॉ. प्रेमा साईं ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों की पीड़ा केवल उनकी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। ऐसे परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी बात सुनना और जरूरत के समय उनके साथ खड़ा होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सहायता का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को यह विश्वास दिलाना है कि वे अकेले नहीं हैं, समाज उनके साथ खड़ा है।



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