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नालंदा- गणेश पूजा समितियों ने SDO से की मुलाकात:पुरानी रूट बहाली, पेड़ों की छंटाई और 6 साउंड लगाने की रखी मांग




बिहारशरीफ के सोहसराय में इन दिनों गणेशोत्सव को लेकर उत्साह का माहौल है, लेकिन प्रशासनिक पाबंदियों को लेकर पूजा समितियों में गहरी नाराजगी भी देखी जा रही है। इसी सिलसिले में सोहसराय में विभिन्न स्थानों पर गणेश प्रतिमा स्थापित करने वाली पूजा समितियों के प्रतिनिधियों ने बिहारशरीफ के अनुमंडलाधिकारी किसलय श्रीवास्तव से मुलाकात कर अपनी प्रमुख मांगों का एक ज्ञापन सौंपा। पूजा समिति के सदस्यों ने स्पष्ट कहा कि वे प्रशासन के हर गाइडलाइन का पालन करते हैं, इसके बावजूद उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है। ‘बिना डीजे के भी खुलवा ली जाती हैं लाइटें’ गणेश पूजा समिति के प्रतिनिधि मोनू कुमार ने अपनी पहली मांग रखते हुए कहा कि पिछले वर्ष (2025) में प्रशासन के निर्देशानुसार डीजे नहीं लगाया था। इसके बावजूद विसर्जन जुलूस के दौरान लाइटें खुलवा दी गई थीं। बेवजह परेशान और दबाया गया था। हम प्रशासन की गाइडलाइन मानते हैं, फिर भी ऐसा व्यवहार होता है। हमारी मांग है कि इस बार ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए और हमें शांतिपूर्ण तरीके से पूजा मनाने दी जाए। झांकियों के लिए पुरानी रूट को किया जाए बहाल समितियों की दूसरी सबसे प्रमुख मांग विसर्जन जुलूस के रूट को लेकर है। मोनू कुमार ने बताया कि हर साल सोहसराय के सभी पूजा पंडालों द्वारा विसर्जन के दौरान भव्य झांकियां निकाली जाती थीं। लेकिन पिछले तीन वर्षों से विसर्जन जुलूस का रूट बदल दिया गया है, जिस कारण अब कोई भी समिति झांकी नहीं निकाल पाती है। उन्होंने एसडीओ से निवेदन किया कि सोहसराय थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रूट पर विगत वर्षों से चली आ रही पुरानी परंपरा को दोबारा बहाल किया जाए, ताकि झांकियां निकाली जा सकें। प्रतिमा टूटने का डर, पेड़ों की छंटाई है आवश्यक ज्ञापन में तीसरी महत्वपूर्ण मांग जलालपुर मोहल्ले से मोरा तालाब तक (रांची रोड) सड़क किनारे लटक रहे पेड़ों की शाखाओं की छंटाई को लेकर है। पूजा समितियों ने बताया कि पिछले 5 सालों से पेड़ों की छंटाई नहीं हुई है। टहनियां इतनी नीचे आ गई हैं कि उनसे यात्रियों को भी खतरा रहता है और सबसे बड़ी चिंता यह है कि विसर्जन के दौरान गुजरने वाली ऊंची प्रतिमाओं के टूटने का डर बना रहता है। इसलिए पेड़ों की छंटाई अति आवश्यक है। डीजे नहीं, सिर्फ माइकिंग और गाइड करने के लिए 6 साउंड की अनुमति चौथी मांग के रूप में पूजा समितियों ने साउंड सिस्टम का एक स्पष्ट प्रारूप तय करने का आग्रह किया है। मोनू कुमार ने बताया कि प्रशासन सिर्फ एक साउंड लगाने की अनुमति देता है, जिसमें हमें खुद अपनी ही आवाज सुनाई नहीं देती। विसर्जन जुलूस में हम इतनी लाइटें लगाते हैं कि आगे चल रहा ट्रक दिखाई नहीं देता, ऐसे में भीड़ और गाड़ियों को गाइड करने के लिए हमें माइकिंग की सख्त जरूरत होती है। हम डीजे नहीं लगा रहे हैं, बस हमारी मांग है कि हमें कम से कम 6 साउंड बॉक्स लगाने की अनुमति दी जाए। हम आश्वासन देते हैं कि ये सभी सीमित और धीमी आवाज में बजेंगे ताकि जुलूस का बेहतर संचालन हो सके। पूजा समितियों ने जिला प्रशासन और एसडीओ से अपील की है कि इन चारों बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया जाए और गणेशोत्सव को बिना किसी व्यवधान के शांति और उल्लास के साथ मनाने की अनुमति दी जाए।



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