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नेशनल लोक अदालत में दो पक्षों के झगड़े का समझौता:पिता-पुत्र का संपत्ति विवाद खत्म, कोर्ट में पेंडिंग 14.97 लाख से ज्यादा मामलों का निराकरण




साल 2026 की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत शनिवार को रायपुर में आयोजित हुई। इसमें कोर्ट में चल रहे मामलों के साथ ऐसे विवाद भी सुलझाए गए, जिन्हें दोनों पक्षों की आपसी सहमति से खत्म किया जा सकता था। लोक अदालत में कुल 14 लाख 97 हजार 744 मामलों का निराकरण हुआ। वहीं, पक्षकारों को कुल 1 अरब 3 करोड़ 13 लाख 61 हजार 484 रुपए का लाभ मिला। पिता-पुत्र का संपत्ति विवाद खत्म लोक अदालत में रिश्तों से जुड़े विवाद भी सुलझाए गए। 2021 से पिता और बेटे के बीच चल रहा पैतृक संपत्ति का विवाद समझाइश के बाद खत्म हो गया। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद खत्म करने पर राजी हो गए। दो पक्षों के विवाद में भी हुआ समझौता वहीं दो पक्षों के विवाद में भी दोनों पक्षों को समझाइश दी गई कि धर्म से ऊपर मानवता है। इसके बाद दोनों पक्षों ने आपसी राजीनामा कर लिया और खुशी-खुशी घर लौट गए। दो पक्षों के विवाद में कहा- धर्म से बड़ा मानवता न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रज्ञा सिंह की अदालत में दो पक्षों के बीच विवाद चल रहा था। दोनों पक्ष इसलिए समझौता नहीं कर रहे थे, क्योंकि विवाद धार्मिक था। कोर्ट ने दोनों को समझाया कि सभी धर्म समान हैं और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। समझाइश के बाद दोनों पक्ष आपसी राजीनामे के लिए तैयार हो गए। उन्होंने समझौता किया और खुशी-खुशी अपने घर लौट गए। 27 हजार से ज्यादा मामले सुलझे रायपुर में आयोजित इस साल की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में कोर्ट में लंबित करीब 27 हजार 296 मामलों का निराकरण किया गया। इसके अलावा प्री-लिटिगेशन और नगर निगम से जुड़े मामलों का भी निपटारा किया गया। जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े 238 मामलों और मोहल्ला लोक अदालत में 65 मामलों का निराकरण हुआ। कमर्शियल कोर्ट का भी एक मामला सुलझाया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिए पक्षकारों को कुल 103 करोड़ 13 लाख 61 हजार 484 रुपए की राशि का लाभ मिला। पति-पत्नी ने भी खत्म किया तलाक का मामला तृतीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय आनंद कुमार ध्रुव की समझाइश के बाद पति-पत्नी ने अपना विवाद खत्म कर लिया। पत्नी ने पति के खिलाफ तलाक की याचिका दायर की थी। कोर्ट ने दोनों को समझाया। इसके बाद दोनों साथ रहने के लिए राजी हो गए और आपसी समझौते के आधार पर मामला खत्म हो गया। दोनों साथ अपने घर चले गए। 2021 से संपत्ति को लेकर था विवाद सप्तम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी अमिता कोशिमा रावटे की अदालत में पिता-पुत्र के बीच पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। यह विवाद 2021 से जारी था। पिता अपनी पैतृक संपत्ति बेच रहे थे। इसके बाद बेटे ने अपने हिस्से की जमीन को लेकर कोर्ट में मामला लगाया था। लोक अदालत में दोनों पक्षों को समझाया गया कि आपसी सहमति से विवाद खत्म करना बेहतर है। इसके बाद पिता और बेटे ने समझौता कर लिया। मामला खत्म होने के साथ ही दोनों के बीच फिर से मधुर संबंध बन गए। पहली बार मोहल्ला लोक अदालत का भी आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के नए संकल्प के तहत मोहल्ला लोक अदालत भी लगाई गई। नगर निगम व्हाइट हाउस में स्थायी लोक अदालत के सभापति एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शांतनु कुमार देशलहरे ने मामलों की सुनवाई की। जोन उपायुक्त रश्मि और जोन कमिश्नर दिव्या चंद्राकर की मौजूदगी में जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े 65 मामलों का मौके पर ही निराकरण किया गया। ऑनलाइन भी हुआ समझौता इस बार लोक अदालत हाइब्रिड तरीके से आयोजित की गई। यानी पक्षकारों ने कोर्ट में पहुंचकर समझौता करने के साथ ही ऑनलाइन और वीडियो के जरिए भी राजीनामा किया। इसमें पारिवारिक, आपराधिक, सिविल, राजस्व, पेंशन, जनोपयोगी सेवाओं और ट्रैफिक चालान से जुड़े मामले शामिल रहे। 8 श्रवण यंत्र, 2 ट्राइसाइकिल और 10 श्रमिक कार्ड बांटे समाज कल्याण विभाग के सहयोग से 8 श्रवण यंत्र और 2 ट्राइसाइकिल बांटी गईं। वहीं श्रम विभाग के सहयोग से असंगठित क्षेत्र के कामगारों को 10 श्रमिक कार्ड दिए गए। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा ने बैंकों और अलग-अलग विभागों के स्टॉल का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को ज्यादा से ज्यादा मामलों को आपसी समझौते से सुलझाने के निर्देश दिए। दूर से आए लोगों के लिए मुफ्त भोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर और गुरुद्वारा धन-धन बाबा साहिब जी, तेलीबांधा के संयुक्त सहयोग से लोक अदालत में आने वाले लोगों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था की गई। कई लोग सैकड़ों किलोमीटर दूर से यहां पहुंचे थे। भोजन मिलने से उनके चेहरों पर संतोष नजर आया।



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