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नोएडा पंडालों में विराजेंगी मथुरा की मिट्टी से बनी गणपति:7 दिन में बनती है एक मूर्ति, 1 से 5 फीट तक की है, 14 को किया जाएगा स्थापित




मथुरा के यमुना नदी की मिट्टी से नोएडा में गणपति बप्पा की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं। गणेश उत्सव को लेकर कोलकाता से आए मूर्तिकार करीब 2-3 महीने से अलग-अलग स्वरूप की गणेश प्रतिमाएं बनाने में जुटे हैं। अब इन मूर्तियों को अंतिम रूप दिया गया है। नोएडा की मिट्‌टी में गंदगी ज्यादा रहती है। इसलिए उसका प्रयोग नहीं किया जाता। मूर्तिकारों के मुताबिक इस बार 150 से ज्यादा ईको फ्रेंडली गणपति की मूर्तियां तैयार की गई हैं। इनमें 1 फीट से लेकर 5 फीट और 10 फीट तक की मूर्तियां शामिल हैं। करीब 45 मूर्तियां बड़े और आकर्षक स्वरूप वाली हैं।
मूर्तिकार कार्तिक ने बताया कि एक मूर्ति तैयार करने में करीब पांच दिन का समय लगता है। इसके बाद उस पर रंग-रोगन, वेशभूषा और शृंगार का काम किया जाता है। तैयार मूर्तियों की कीमत 700 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक है। इस बार अलग-अलग थीम पर गणपति
इस बार गणेशजी की प्रतिमाओं को अलग-अलग स्वरूप और मुद्राओं में तैयार किया गया है। इनमें लालबाग के राजा, भगवान शिव की गोद में बाल गणेश, छत्रपति शिवाजी महाराज के गणेश रूप और शिवजी के अघोरी रूप में गणेश की प्रतिमाएं शामिल हैं। ऐसे तैयार होती है ईको फ्रेंडली मूर्ति
मूर्तिकार कार्तिक के मुताबिक सबसे पहले लकड़ी और घास-फूस से मूर्ति का फ्रेम तैयार किया जाता है। इसके बाद फ्रेम पर मिट्टी की परत चढ़ाई जाती है। इसमें मथुरा की यमुना की मिट्टी के साथ चिकनी मिट्टी, जौ, भूसा और पूजन सामग्री समेत अन्य प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। कई चरणों में आकार देने के बाद मूर्ति को सुखाया जाता है। इसके बाद मूर्ति पर रंग किया जाता है। अंत में भगवान गणेश की वेशभूषा, आभूषण और शृंगार कर प्रतिमा को अंतिम रूप दिया जाता है।
आसपास के जिलों से भी बुकिंग
मूर्तिकारों ने बताया कि हर साल ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं की मांग बढ़ रही है। नोएडा और गाजियाबाद के अलावा आसपास के जिलों से भी मूर्तियों की बुकिंग हुई है। अब गणेश चतुर्थी से पहले इनकी डिलीवरी शुरू होगी।
इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को है। 13 सितंबर से श्रद्धालु गणपति की मूर्तियां खरीदकर घरों, मंदिरों, कॉलोनियों और पंडालों में स्थापित करेंगे। इसके लिए पंडालों और घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं।



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