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न्यायपालिका में हिन्दी के इस्तेमाल पर जोर:पटना में हिन्दी दिवस पखवाड़ा समारोह, 150 से अधिक अधिवक्ता जुटे




पटना में सोमवार को ‘हिन्दी दिवस पखवाड़ा समारोह’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का केंद्रीय विषय ‘जनता को न्याय, जनता की भाषा हिन्दी में’ रखा गया था। समारोह में ‘जनता को न्याय, जनता की भाषा हिन्दी में’ विषय के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। विशेष रूप से न्यायपालिका में हिंदी और भारतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ाने, आम नागरिक के लिए न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सहज-समझने योग्य बनाने, भारतीय भाषाओं को उनके उचित सम्मान और व्यवहारिक स्थान दिलाने की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया। आयोजकों की ओर से कार्यक्रम के माध्यम से विचार प्रमुखता से रखा गया कि यदि नागरिक अपने अधिकारों, न्यायिक प्रक्रिया और कानूनी विषयों को अपनी समझ की भाषा में बेहतर ढंग से समझ सके, तो न्याय व्यवस्था के साथ उसका जुड़ाव और अधिक प्रभावी हो सकता है। कार्यक्रम में 150 से अधिक अधिवक्ता, हिन्दी प्रेमी और प्रबुद्ध लोग सम्मिलित हुए। भारतीय भाषा अभियान की भूमिका रही समारोह का उद्देश्य न्याय व्यवस्था-सार्वजनिक जीवन में हिन्दी और भारतीय भाषाओं के अधिकाधिक प्रयोग की आवश्यकता पर विमर्श करना रहा। कार्यक्रम के आयोजन में भारतीय भाषा अभियान, बिहार इकाई की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समारोह के माध्यम से यह संदेश सामने रखा गया कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि आम नागरिक के अधिकारों, न्याय तक उसकी पहुंच और लोकतांत्रिक सहभागिता से भी जुड़ा विषय है। भारतीय भाषा अभियान की सदस्य सुकन्या संयोजीका शिखा सिंह परमार ने कहा कि चिंतन की भाषा हिंदी बने। यह हमारी प्रतियोगिता होनी चाहिए। वही, इंद्रदेव प्रसाद के हिंदी के प्रयासों के लिए इनका आभार व्यक्त किया। ये अपने प्रयास से पटना हाईकोर्ट में हिन्दी भाषा में न्याय दिलाने के लिए पिछले कई दशकों से प्रयास कर रहे हैं।
अतिथियों की उपस्थिति ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा समारोह के लिए जारी कार्यक्रम विवरण के अनुसार मुख्य अतिथि बिहार सरकार के माननीय विधि एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री संजय सिंह टाइगर, अतिविशिष्ट अतिथि पटना उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता श्री एस.डी. संजय तथा अतिविशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह डॉ. मोहन सिंह को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. राजेंद्र कुमार, विभागाध्यक्ष, हिंदी, कला एवं मानविकी संकाय, राजगीर विश्वविद्यालय तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शिक्षा एवं संस्कृत क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में आमंत्रित थे। समारोह का आयोजन भारतीय भाषा अभियान, बिहार इकाई की ओर से किया गया, जबकि कार्यक्रम के आमंत्रण में भारतीय भाषा मंच को राष्ट्रीय स्तर पर संबद्धता के रूप में दर्शाया गया था। हिन्दी के साथ भारतीय भाषाओं के सम्मान पर जोर समारोह की अवधारणा केवल हिन्दी के प्रचार-प्रसार तक सीमित न होकर भारतीय भाषाओं के संरक्षण और उनके सम्मान से भी जुड़ी रही। कार्यक्रम के शीर्ष संदेश “मां, मातृभूमि-मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं” के माध्यम से मातृभाषा के प्रति सम्मान और भारतीय भाषाई विरासत के संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के माध्यम से यह विचार भी सामने आया कि भारत की भाषाई विविधता उसकी सांस्कृतिक शक्ति है, न्याय और प्रशासन में नागरिकों की भाषाई सुविधा को महत्व दिया जाना आवश्यक है।
हिन्दी दिवस पखवाड़ा के समापन पर उठे महत्वपूर्ण प्रश्न हिंदी दिवस पखवाड़ा के इस कार्यक्रम ने हिंदी को केवल साहित्य और संस्कृति की भाषा के रूप में देखने के बजाय न्याय, प्रशासन, नागरिक अधिकार और जनसरोकारों की भाषा के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। समारोह में हिंदी के प्रयोग के साथ-साथ यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण रहा कि न्याय की प्रक्रिया आम नागरिक के लिए कितनी सरल, सुगम और समझने योग्य हो सकती है। इसी संदर्भ में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक जनसुलभ बनाने से जोड़कर देखा गया। समारोह का मूल संदेश रहा कि न्याय तभी अधिक जनसुलभ होगा, जब आम नागरिक न्याय की प्रक्रिया और अपने अधिकारों को सहज भाषा में समझ सके। इसी विचार के साथ “जनता को न्याय, जनता की भाषा हिंदी में” को कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश बनाया गया। आज का यह समारोह हिन्दी दिवस पखवाड़ा के अवसर पर हिन्दी, मातृभाषा, न्याय और नागरिक अधिकारों के बीच संबंध को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन रहा। धन्यवाद ज्ञापन अधिवक्ता रणविजय सिंह ने किया।



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