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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:जो भी काम करें, गंभीरता, लगन व ईमानदारी से करें




बहानों को आगे-पीछे झूठ में बदलना ही पड़ता है, इसलिए बहाने बनाने की आदत छोड़ें। जो भी काम करें, गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। बहाना एक तरह की बेईमानी है और यदि आदत में आ गया तो बहाना अपराध बन जाएगा। अगर आप बहुत काम नहीं करते हैं तो इसका मतलब आपको बहाने बनाने ही पड़ेंगे। इसका उल्टा भी है। आप कम काम करेंगे तो दूसरों से बहाने बनाएंगे और बहुत अधिक काम करेंगे तो खुद से बहाना बना रहे होंगे। यह हसल-कल्चर का वक्त है। बड़े लक्ष्य की पूर्ति के लिए लगातार और अत्यधिक काम करना हसल-कल्चर कहलाता है। इसमें आप पांच चीजें दांव पर लगा रहे होते हैं- स्वास्थ्य, नींद, विश्राम, सामाजिक संबंध और पारिवारिक संबंध। 10-12 घंटे लोग लगातार काम करते हैं और ऐसा मान लेते हैं कि खूब मेहनत करने से ही परिणाम मिलता है। लेकिन यदि आप 10 घंटे काम करते हैं तो 8 घंटे तो परिणाम देने के लिए करिए, लेकिन 2 घंटे, उन 8 घंटों को ताकत देने के लिए करिए। फिर वह निजी रुचि का काम हो, योग हो, परिवार के साथ समय बिताना हो।



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