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केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के तहत देश के 50 प्रमुख शहरों को मॉडल क्लीन सिटी के रूप में विकसित करने के लिए ‘प्रगति-50’ पहल शुरू की है। बिहार से पटना और गयाजी को इसमें शामिल किया गया है। शहर के प्रमुख स्थल रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बाजारों से 2 बार कचरा उठाया जाएगा। आवास-शहरी कार्य मंत्रालय की इस पहल के तहत दोनों शहरों में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट को बेहतर बनाकर निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। 51वीं प्रगति बैठक के निर्देशों के आधार पर तैयार इस योजना में स्वच्छता कार्यों की निगरानी के लिए ‘स्वच्छतम पोर्टल’ पर विशेष डैशबोर्ड बनाया गया है। जिससे कचरे के उठाव से लेकर उसके निस्तारण तक की रियल टाइम जानकारी मिल सकेगी। केंद्रीय अधिकारियों और थर्ड पार्टी एजेंसियों को जमीनी स्तर पर कार्यों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। दोनों शहरों के लिए कार्यों को तीन चरणों में बांटा गया है। इनमें छह महीने का अल्पकालिक, 6 से 12 महीने का मध्यकालिक और 12 से 24 महीने का दीर्घकालिक लक्ष्य शामिल है। बाजारों और पर्यटन स्थलों पर बढ़ेगी सफाई प्रमुख बाजारों, पर्यटन स्थलों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में नाइट स्वीपिंग की व्यवस्था की जाएगी। इन क्षेत्रों में दिन में 2 बार कचरा उठाने का लक्ष्य रखा गया है। सार्वजनिक स्थानों से पोस्टर और लटकते तार हटाए जाएंगे, जबकि दीवारों पर स्थानीय कला और संस्कृति को दर्शाने वाली पेंटिंग बनाई जाएंगी। पटना और गयाजी में नदियों, घाटों, तालाबों और प्रमुख नालों की सफाई पर भी विशेष जोर रहेगा। सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई को पूरी तरह मैकेनाइज्ड करने की योजना है।
अलग बजट नहीं, कई स्रोतों से जुटेंगे संसाधन मंत्रालय के अनुसार, ‘प्रगति-50’ के लिए अलग से नया बजट जारी नहीं किया जाएगा। कार्यों को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0, 16वें वित्त आयोग के अनुदान, पीपीपी मॉडल और सीएसआर फंड के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा। नागरिकों की स्वच्छता संबंधी शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए स्वच्छता ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। डीएम और नगर आयुक्त संभालेंगे कमान योजना के क्रियान्वयन के लिए पटना और गयाजी में जिला स्तरीय उच्चस्तरीय टीम गठित की जाएगी। जिलाधिकारी और नगर आयुक्त संयुक्त रूप से इसकी अगुवाई करेंगे। टीम में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह टीम शहर के लिए विस्तृत एक्शन प्लान तैयार कर उसे लागू कराएगी। राज्य स्तर पर प्रधान सचिव, नगर विकास विभाग हर 15 दिन में योजना की प्रगति की समीक्षा करेंगे। वहीं केंद्रीय स्तर पर हर दो महीने में मंत्री स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी।
पटना में 12,500 से ज्यादा स्ट्रीट लाइटें हुईं दुरुस्त दूसरी तरफ पटना में खराब स्ट्रीट लाइटों को ठीक करने के लिए पटना नगर निगम ने अभियान तेज कर दिया है। शहर के अलग-अलग इलाकों में 26 से 31 टीमें लगातार फील्ड में रहकर खराब लाइट, वायर, स्विच और अन्य तकनीकी खामियों को दूर कर रही हैं। निगम के अनुसार, अभियान के तहत अब तक 12,500 से अधिक स्ट्रीट लाइटें चालू कराई जा चुकी हैं। रोजाना औसतन 500 से 550 लाइटों की मरम्मत की जा रही है। अभियान के दौरान 2,300 से अधिक जगहों पर नई स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं, जबकि 10 हजार से ज्यादा लाइटों में वायर, स्विच और दूसरी तकनीकी समस्याओं को ठीक किया गया है। निगम का कहना है कि बार-बार खराब होने वाली लाइटों को अब रिपेयर करने के बजाय नई लाइट से बदला जा रहा है।
घाटों और प्रमुख सड़कों पर भी सुधार नगर निगम की टीमों ने भद्र घाट और महावीर घाट के पहुंच पथ पर खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त कर दिया है। इससे रात में घाटों की ओर आने-जाने वाले लोगों को बेहतर रोशनी मिल सकेगी। वहीं, प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय से राजापुर पुल तक स्ट्रीट लाइट से जुड़ी समस्याओं का भी समाधान किया गया है। इसके अलावा ऑफिसर्स फ्लैट, छज्जूबाग, भट्टाचार्या रोड, बुद्ध मार्ग और गाय घाट गुरुद्वारा से सिविल कोर्ट तक के विभिन्न हिस्सों में भी खराब लाइटों को ठीक किया गया है।
शिकायतों के साथ फील्ड सर्वे पर भी फोकस स्ट्रीट लाइट की शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए निगम की 26 से 31 टीमें अलग-अलग इलाकों में काम कर रही हैं। टीमें नागरिकों से मिली शिकायतों के अलावा खुद फील्ड निरीक्षण के दौरान चिन्हित खराब लाइटों को भी दुरुस्त कर रही हैं। नगर आयुक्त यशपाल मीणा अभियान की नियमित समीक्षा कर रहे हैं।
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पटना-गयाजी बनेंगे मॉडल क्लीन सिटी:'प्रगति-50' पहल में बिहार के 2 शहर शामिल; बाजारों-रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से 2 बार उठेगा कचरा
