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पठानकोट जिले के शाहपुरकंडी में 200 फीट ऊंचे टावर पर चढ़कर अपनी मांगों के हक में प्रदर्शन कर रहे बुजुर्ग पिछले 93 घंटे से खुले आसमान के नीचे दिन-रात गुजार रहे हैं। मंगलवार सुबह 10 बजे से टावर पर चढ़े दोनों बुजुर्गों 85 वर्षीय शर्म सिंह और 81 वर्षीय कुलविंदर सिंह का कहना है कि भले ही इन 93 घंटों में उनका शरीर कमजोर हुआ है, तबीयत बिगड़ रही है,लेकिन हौसले बुलंद हैं। वे इस बार परिवारिक सदस्य के नियुक्ति पत्र और गैरकानूनी तरीके से नौकरी हासिल करने वाले 32 लोगों के टर्मिनेशन लैटर लिए बिना नीचे नहीं उतरेंगे। यहां तक कि दोनों बुजुर्गों ने प्रशासन द्वारा मीटिंग की पेशकश भी ठुकरा दी है। उनका कहना है कि पिछले 34 साल से हो रही मीटिंगों का ही नतीजा है कि उनके बेटे भी ओवरएज हो गए। अब उन्हें नौकरी नहीं मिलेगी। लेकिन, अब वे अपने पौत्रों के लिए नौकरी की मांग कर रहे हैं। वहीं, बांध प्रशासत के अधिकारियों का कहना है कि दोनों बुजूर्ग या कमेटी के अन्य सदस्य बैठक नहीं कर रहे। लेकिन, उन्होंने सारी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है। जबकि, जल संसाधन विभाग पंजाब के प्रधान सचिव कृष्ण कुमार का कहना है कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। वे चीफ इंजीनियर शेर सिंह से इस पूरे मामले की रिपोर्ट लेंगे। उसके बाद की कुछ बता सकते हैं। तहसील ने भेजा मीटिंग का प्रपोजल ठुकराया बैराज औसती संघर्ष कमेटी जैनी के प्रधान दयाल सिंह का कहना है कि उन्हें तहसीलदार धारकलां का फोन आया था कि बुजूर्गों को नीचे उतारो और मीटिंग करो। उसमें उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा। प्रधान के मुताबिक पिछले 34 साल के संघर्ष में मीटिंगें ही की गईं। उनकी मांगों पर गौर किया होता तो इस तरह बुजूर्गों को जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ती। दयाल सिंह ने बताया कि दोनों बुजूर्ग अपनी मर्जी से टावर पर चढ़े हैं। अब उनका कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक वे नीचे नहीं आएंगे। शरम सिंह और कुलविंदर दोनों के बेटे हुए ओवरएज दयाल सिंह ने बताया कि शरम सिंह और कुलविंदर सिंह दोनों के 2-2 बेटे हैं। सभी 45 से 50 आयुवर्ग के हैं यानि ओवरएज हो चुके हैं। दयाल सिंह के मुताबिक शरम सिंह और कुलविंदर सिंह ने अब अपने पौत्रों के लिए नौकरी की मांग की है। दयाल सिंह ने कहा कि जिंदगी के जिस मोड़ पर उन्हें सबसे ज्यादा केयर की जरूरत है, वहां उन्हें बच्चों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। क्या कहते हैं अधिकारी बैराज बांध प्रशासन के निगरान अभियंता कुलविंदर सिंह का कहना है कि उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है। बातचीत से हल निकलेगा। लेकिन, उसके लिए बुजूर्गों को नीचे उतरना होगा। हालांकि, संघर्ष कमेटी ने साफ कर दिया है कि यदि बुजुर्गों को कोई शारीरिक नुकसान होता है, तो इसके लिए पठानकोट जिला प्रशासन और डैम प्रशासन सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। बुजूर्गों से नेगोसिएशन चल रही पठानकोट डीसी पल्लवी का कहना है कि बांध प्रशासन को जल्द से जल्द कोई हल निकालने को कहा गया है। टावर पर चढ़े दोनों बुजूर्गों से भी नेगोसिएशन चल रही है। संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों को पूरे मामले से अवगत करवाया गया है। बुजूर्गों की सुरक्षा के इंतजाम कर दिए गए हैं। जल्द ही इस मामले का हल कर बुजूर्गों को नीचे उतारा जाएगा। सचिव बोले, कोई जानकारी नहीं सभी अधिकारी उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने की बात कह रहे हैं। लेकिन, जल संसाधन विभाग पंजाब के प्रधान सचिव कृष्ण कुमार का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। वे इस समय एयरपोर्ट पर हैं। चीफ इंजीनियर से इस बाबत पूछा जाएगा और रिपोर्ट हासिल की जाएगी।
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पठानकोट-टावर पर चढ़े बुजुर्ग प्रशासन से नहीं करेंगे मीटिंग:बोले-34 साल के संघर्ष में बेटे भी हुए ओवरएज; सचिव बोले-मामले की जानकारी नहीं
