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पद्म भूषण से सम्मानित दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर मंगलवार को गम्हरिया लाल बिल्डिंग परिसर में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता फूलकांत झा के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने दिशोम गुरु के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके संघर्षमय जीवन, सामाजिक सरोकारों और जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को स्मरण किया। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिबू सोरेन केवल एक जननेता ही नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और जनआंदोलन के प्रतीक थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन में आदिवासी, मूलवासी, गरीब, शोषित और वंचित समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष किया। उनका संघर्ष, त्याग, सादगी और समाज के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा। वक्ताओं ने कहा कि दिशोम गुरु ने झारखंड आंदोलन को नई दिशा और पहचान देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इस अवसर पर इंद्रकांत झा, गोविंद पाठक, देव कुमार दास, अरुण कुमार दास, अपन चंद्रा, महावीर गोराई, सुफल गोराई, राधेश्याम महतो, पंकज अग्रवाल, दीपक झा, शंकर शर्मा, कृपा जी, रुपेश तथा लाल महतो सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे। बाजार के दुकानदारों, व्यवसायियों एवं सब्जी विक्रेताओं ने भी श्रद्धांजलि सभा में भाग लेकर दिशोम गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता केपी सोरेन ने भी प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में दिशोम गुरु के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, त्याग और जनसेवा का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन झारखंड की पहचान, जल-जंगल-जमीन की रक्षा तथा आदिवासी, मूलवासी और वंचित समाज के संवैधानिक अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। उनके नेतृत्व ने लाखों लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया और न्याय के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। के पी. सोरेन ने कहा कि दिशोम गुरु के विचार और आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके जीवनकाल में थे। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे दिशोम गुरु के संघर्ष, ईमानदारी, सादगी और जनसेवा की भावना को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए समाज में एकता, भाईचारे और विकास की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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पद्म भूषण से सम्मानित दिशोम गुरु के आदर्श आज भी प्रेरणास्रोत : केपी सोरेन
