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'पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कृषि उत्पादन बढ़ाने पर मंथन':कृषि विश्वविद्यालय में सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव, कहा- जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती




डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय और इंडियन पोटाश लिमिटेड फाउंडेशन के संयुक्त देखरेख में गुरुवार को विद्यापति सभागार में ‘प्रोडक्टिविटी एंड ग्रीन ग्रोथ’ विषय पर सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) इसमें इंडस्ट्री पार्टनर के रूप में शामिल रहा। कॉन्क्लेव में कृषि वैज्ञानिकों, छात्रों, नीति निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कृषि उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर मंथन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) के सचिव डॉ. ब्रह्म स्वरूप द्विवेदी और विशिष्ट अतिथि तमिलनाडु सरकार के पूर्व मुख्य सचिव और आईपीएल फाउंडेशन एवं आईपीएल सेंटर के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. राजीव रंजन रहे। अध्यक्षता कुलपति डॉ. पी.एस. पाण्डेय ने की। ‘कम संसाधनों में अधिक उत्पादन करना समय की मांग’ कार्यक्रम की शुरुआत भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन, राष्ट्रगान और कुलगीत से हुई। निदेशक छात्र कल्याण डॉ. रमन कुमार त्रिवेदी ने स्वागत भाषण दिया। डीन पीजीसीए डॉ. मयंक राय ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। आयोजन सचिव डॉ. सत्य प्रकाश ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कुलपति डॉ. पीएस पाण्डेय ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी अब विकल्प नहीं, बल्कि कृषि के भविष्य के लिए अनिवार्यता है। कम संसाधनों में अधिक उत्पादन करना समय की मांग है। प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाए बिना उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती, उर्वरकों का संतुलित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और हरित तकनीकों को साथ लेकर चलना होगा। विश्वविद्यालय ऐसे मॉडल विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें लैब, लैंड और लाइवलीहुड आपस में जुड़े हों और किसान हरित विकास में उद्यमी बनें। ‘पोषक तत्वों के उपयोग को बढ़ावा देना होगा’ डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि आरपीसीएयू और आईपीएल फाउंडेशन का सहयोग उद्योग और शिक्षा जगत के बीच की दूरी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विश्वविद्यालय में आईपीएल सेंटर को टिकाऊ कृषि इनपुट और ज्ञान साझा करने के लिए नवाचार केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य रासायनिक भार कम करने, मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने, पोटाश और अन्य पोषक तत्वों के उपयोग को बढ़ावा देना है। मुख्य व्याख्यान में डॉ. ब्रह्म स्वरूप द्विवेदी ने विज्ञान आधारित टिकाऊ कृषि की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, मृदा क्षरण और जल संकट भारतीय कृषि के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इनसे निपटने के लिए प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों के साथ सटीक कृषि, जैव उर्वरक और संसाधन संरक्षण तकनीकों को एकीकृत करना होगा। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए कृषि उत्पादकता और पारिस्थितिक सुरक्षा को साथ-साथ लेकर चलना होगा।



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