Headlines

पुरानी कड़वाहट भुलाने में मदद दे रही सिबलिंग थेरेपी:अमेरिका में 25% वयस्क भाई-बहनों में बात तक नहीं होती; ऐसे रिश्तों को मिल रहा री-स्टार्ट




डैनियल और बॉब (कनेक्टिकट में चर्च के पास्टर) की उम्र 60 वर्ष से अधिक है। दोनों भाइयों का रिश्ता सामान्य था, वे त्योहारों पर मिलते थे और साथ जश्न मनाते थे। इस बीच छोटे भाई बॉब ने सुझाव दिया – ‘क्यों न हम दोनों भी सिबलिंग थेरेपी लें?’ डैनियल हिचकिचाए। उन्हें डर था कि 50 साल पुरानी बातों को कुरेदने से उनका आज का अच्छा रिश्ता भी खराब न हो जाए। लेकिन बॉब के जोर देने पर दोनों ऑनलाइन थेरेपी सत्र के जरिए थेरेपिस्ट रेचल बेंजामिन के सामने बैठ गए। थेरेपी के दौरान चौंकाने वाली बातें सामने आईं। उनके रिश्ते में बचपन से ही बड़े-छोटे भाई का तनाव बना रहा। बॉब को लगता था कि डैनियल हमेशा बड़े भाई की तरह उन पर हावी रहे, जिससे उनका व्यक्तित्व दब गया। वक्त बीतते-बीतते दोनों के बीच भावनात्मक दूरी आ गई थी। थेरेपी के बाद दोनों भाइयों के रिश्ते में जमी बर्फ पिघलने लगी। इसका अंत सुखद कहानी जैसा नहीं था, पर इसने दोनों को अतीत के बोझ से मुक्त होकर एक-दूसरे के करीब आने मौका दिया। अंत में, दोनों ने गले लगकर आगे संपर्क बनाए रखने का वादा किया। थेरेपिस्ट मैट लुंक्विस्ट कहते हैं,‘बीते कुछ वर्षों में सिबलिंग थेरेपी की मांग तेजी से बढ़ी है। इसमें पचास या साठ की उम्र का पड़ाव पार कर चुके वयस्क भाई-बहन अपने बचपन के पुराने घावों, ईर्ष्या और अनसुलझे विवादों को सुलझाने के लिए एक साथ काउंसिलिंग का सहारा ले रहे हैं। ऑनलाइन सेशन होने से अलग-अलग शहरों में रहने वाले भाई-बहन भी अब साथ आ पा रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक अक्सर समाज के डर से जीवनसाथी से तो अलग नहीं हो पाते, लेकिन भाई-बहनों से दूरी बना लेते हैं। एक ताजा सर्वे के मुताबिक, 25% अमेरिकी वयस्क भाई या बहन से पूरी तरह अलग हो चुके हैं और उनमें से आधे तो कभी दोबारा बात भी नहीं करना चाहते। ऐसे में यह थेरेपी बिखरते परिवारों को जोड़ने का काम कर रही है। इसके अलावा, जब माता-पिता के बुजुर्ग होने या उनकी मृत्यु के बाद जायदाद की देखभाल या जिम्मेदारियां संभालते समय पुरानी कड़वाहट दोबारा उभर आती है। ऐसे संकट के समय यह थेरेपी खूबसूरत रिश्तों को बचाने में अहम साबित हो रही है। रिश्तों को नए नजरिए से समझने का मौका देती है थेरेपी मनोवैज्ञानिक एलिसन काट्ज कहते हैं,‘कई भाई-बहन बचपन में हुए भेदभाव या मन की कड़वाहट को दबाकर रखते हैं, क्योंकि वे यह मानना चाहते हैं कि माता-पिता ने सभी बच्चों को बराबर प्यार दिया। पर यही अनकही बातें आगे चलकर रिश्तों में दूरी और तनाव पैदा करती हैं। सिबलिंग थेरेपी लोगों को इन दबे हुए भावों को समझने और रिश्तों को बेहतर बनाने का मौका देती है। यह उस इंसान के साथ सालों पुराने घाव भरने और दोबारा जुड़ने की साहसिक कोशिश है, जिसके साथ आपने कभी बचपन की कार की पिछली सीट साझा की थी। यह बिना किसी सामाजिक दबाव के, आपसी प्रेम को दोबारा जीवित करने का असरदार जरिया है।’



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *