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प्रेरक कथा: वनवासी ने चंदन का कोयला बनाकर बेचा:अवसर का लाभ तभी मिलता है, जब उसके महत्व को समझा जाए, बिना जानकारी किया गया काम नुकसान पहुंचाता है




जीवन में कई बार हमें ऐसे अवसर मिलते हैं, जो हमारे जीवन की दिशा बदल सकते हैं, लेकिन अगर अवसरों के वास्तविक महत्व का ज्ञान न हो, तो वही अवसर हमारे हाथों से निकल जाते हैं। यह बात एक लोक कथा से समझ सकते हैं- पुराने समय में एक राजा शिकार के लिए जंगल में गया। वह शिकार की तलाश में इतना आगे निकल गया कि अपने राज्य लौटने का रास्ता ही भूल गया। घंटों तक भटकने के कारण वह भूख और प्यास से व्याकुल हो गया। तभी उसे जंगल के बीच एक छोटी-सी झोपड़ी दिखाई दी। वहां रहने वाले वनवासी ने बिना किसी परिचय के राजा का आदर-सत्कार किया, उसे भोजन कराया और पानी पिलाया। वनवासी के व्यवहार से राजा प्रसन्न हुआ। उसने अपनी पहचान बताते हुए कहा, “मैं इस राज्य का राजा हूं। तुम्हारी सेवा से प्रसन्न होकर मैं तुम्हें अपने नगर का एक चंदन का बाग उपहार में देता हूं।” राजा के आदेश पर वनवासी को वह बहुमूल्य बाग मिल गया। वनवासी को चंदन की लकड़ी के वास्तविक मूल्य और उपयोग की जानकारी नहीं थी। वह पेड़ों को काटता, उनकी लकड़ियां जलाकर कोयला बनाता और बाजार में बेच देता। उसे लगता था कि यही सबसे अच्छा लाभ है। धीरे-धीरे पूरे बाग के लगभग सभी चंदन के पेड़ समाप्त हो गए। केवल एक अंतिम पेड़ बचा। जिस दिन वह अंतिम पेड़ काटकर कोयला बनाने वाला था, उसी दिन तेज बारिश शुरू हो गई। भीगी लकड़ियों से कोयला बनाना संभव नहीं था। मजबूरी में उसने लकड़ी को उसी रूप में बाजार ले जाकर बेचने का निर्णय लिया। जैसे ही वह चंदन की लकड़ियां लेकर बाजार पहुंचा, उनकी सुगंध चारों ओर फैल गई। व्यापारियों ने ऊंची कीमत देकर सारी लकड़ियां खरीद लीं। वनवासी को पहली बार पता चला कि जिस लकड़ी को वह जलाकर मामूली कोयला बना रहा था, उसकी वास्तविक कीमत उससे कई गुना अधिक थी। यह जानकर वह गहरे पश्चाताप में डूब गया। उसने सोचा, यदि मुझे पहले ही चंदन का महत्व पता होता, तो मैं पूरे बाग से अपार संपत्ति अर्जित कर सकता था, लेकिन अज्ञानता ने उसके बहुमूल्य अवसर को साधारण कोयले में बदल दिया। कथा की सीख



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