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मऊगंज जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने दूध की गुणवत्ता और मिलावट की जांच के लिए अभियान तेज कर दिया है। मंगलवार सुबह फूड इंस्पेक्टर अमित तिवारी ने दूध बेचने और इकट्ठा करने वालों की जांच की। इस दौरान उन्हें रैपिड मिल्क टेस्टिंग किट के इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई। शासन के निर्देश पर अभियान शुरू
मध्य प्रदेश शासन के खाद्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत ग्राहकों, फेरी लगाकर दूध इकट्ठा करने वाले विक्रेताओं, दूध कलेक्शन सेंटर और चिलिंग सेंटर संचालकों को दूध में होने वाली मिलावट की पहचान के तरीके बताए जा रहे हैं। किट से कई तरह की मिलावट की जांच
फूड इंस्पेक्टर अमित तिवारी ने रैपिड मिल्क टेस्टिंग किट से दूध की शुरुआती जांच करने का तरीका समझाया। उन्होंने बताया कि इस किट की मदद से दूध में नमक, यूरिया, डिटर्जेंट, स्टार्च, शक्कर और बाहरी फैट जैसी मिलावट की पहचान की जा सकती है। कलेक्शन सेंटर पर किट रखने की सलाह दूध इकट्ठा करने वाले विक्रेताओं को दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित जांच करने की जानकारी दी गई। वहीं दूध कलेक्शन और चिलिंग सेंटर संचालकों को अपने केंद्रों पर रैपिड मिल्क टेस्टिंग किट रखने और उसका लगातार इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। विभाग के साथ विक्रेताओं की जिम्मेदारी भी जरूरी खाद्य विभाग के अनुसार अभियान का उद्देश्य ग्राहकों तक सुरक्षित और अच्छी गुणवत्ता का दूध पहुंचाना है। अधिकारियों ने कहा कि मिलावट रोकने के लिए केवल विभाग की जांच पर्याप्त नहीं है। दूध इकट्ठा करने वाले विक्रेताओं और कलेक्शन सेंटर संचालकों की जागरूकता और नियमित जांच भी जरूरी है। दूध की गुणवत्ता पर रखी जाएगी नजर मऊगंज में खाद्य विभाग के सक्रिय होने के बाद दूध की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। विक्रेताओं और कलेक्शन सेंटर संचालकों को भी रैपिड टेस्टिंग किट के जरिए दूध की शुरुआती जांच करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि मिलावट की स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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फूड इंस्पेक्टर ने दूध विक्रेताओं को मिलावट पहचानना सिखाया:रैपिड किट से नमक, यूरिया, डिटर्जेंट जैसी मिलावट की जांच बताई; सेंटरों को किट रखने की सलाह
