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हर कोई दुनिया को अलग नज़र से देखता है। पर क्या हमने कभी जानवरों का नजरिया जानने की कोशिश की? उनको समझने के लिए कुछ किया? अगर नहीं, तो आज ही इसकी शुरुआत कीजिए। ट्राईसिटी में दो ऐसी जगहें हैं जो आपको जानवरों के लिए कुछ करने का मौका देगी। पहली है युवसत्ता एनजीआे, जिन्होंने पिछले साल एनिमल फैन क्लब की शुरुआत की। इसमें स्कूलों के बच्चों को जोड़ा जाता है। दूसरी, छतबीड़ ज़ू – यहां एनिमल्स को अडॉप्ट किया जाता है। युवसत्ता के फाउंडर प्रमोद शर्मा ने बताया – हमने पांच शहरों में एनिमल फैन क्लब चलाया, जिनमें चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, होशियारपुर और गुरुग्राम शामिल हैं। हमारा उद्देश्य युवाओं में मानवतावाद और अहिंसा की भावना बढ़ाना है। जितना ज्यादा बच्चे जानवरों से घुलेंगे-मिलेंगे, उन्हें प्रकृति के बारे में पता लगेगा, वह करुणामय बनेंगे। हम इन क्लब्स को अमेरिका के हेलेन वुडवर्ड एनिमल सेंटर के साथ मिलकर चलाते हैं। अभी न्यू पब्लिक स्कूल में यह क्लब जारी है। रिमल शर्मा ने बताया – हमने एक प्लान बनाया है, जिसमें सारा साल बच्चों के लिए एक्टिविटीज़ तय की है कि कैसे उन्हें एनिमल्स से जोड़ना है। इस साल का हमारा थीम है – काम में करुणा, जानवरों की देखभाल, अपनी दुनिया को साझा करना। इसके तहत हम स्टूडेंट्स को बर्ड पार्क, ज़ू आदि आैर नेचर वॉक पर लेकर जाते हैं। एक्सपर्ट्स के लेक्चर करवाते हैं। एनिमल्स की केयर को क्रिएटिविटी से जोड़ते हैं। हर स्टूडेंट ने अपने घर के आस पास किसी न किसी कम्युनिटी एनिमल को अडॉप्ट किया आैर वह उसकी देखभाल करते हैं। मकसद बच्चों में करुणा को जगाना है ताकि जानवरों का भी ध्यान रखा जा सके। एनिमल-अडॉप्शन शुल्क एनिमल मंथली ईयरली हाथी 23,900 2,86,800 शेर/बाघ 17,200 2,06,400 चिंकारा 700 8,400 बंदर 1,700 20,400 कछुआ 800 9,600 शुतुरमुर्ग 3,100 37,000 तेंदुआ 6,900 82,800 सांप 300 3,600 हिरण 1,200 14,400 काला हंस 200 2,400 तोता/तीतर 100 1,200 ज़ेब्रा 2,100 25,200 ऊदबिलाव 4,800 57,600 बजरीगर 50 600 गौर 4,800 57,600 ईमू 4,600 55,200 सियार 5,200 62,400 मोर 300 3,600 कॉकटू 900 10,800 सांभर 2,100 25,200 _photocaption_एनिमल अडॉप्ट करने का तरीका*photocaption* _photocaption_यह कहना है स्टूडेंट्स का…*photocaption* छतबीड़ ज़ू के एजुकेशन ऑफिसर हरपाल सिंह ने बताया – छतबीड़ ज़ू में कई साल से लोग एनिमल्स को अडॉप्ट करते हैं। इस समय कई सौ जानवरों को अडॉप्ट किया हुआ है। इसमें इंडिविजुअल और ग्रुप्स में भी लोग अडॉप्ट करते हैं। यहां 125 स्पीशीज़ हैं और 2200 जानवरों की संख्या है। एक ही जानवर को कई लोग अडॉप्ट करते हैं। अडॉप्शन की सारी जानकारी ज़ू में विजिट करके या फिर https://chhatbirzoo.gov.in/contact-us वेबसाइट पर ले सकते हैं। अडॉप्शन सर्टिफिकेट भी दिया जाता है। बर्ड पार्क, छतबीड़ ज़ू आदि विजिट करते-करते अब हमें वहां के जानवरों और परिंदों से लगाव हो गया है। उनसे जुड़े पोस्टर बनाना अब होमवर्क नहीं, जिम्मेदारी लगता है। जानवर अपने लगते हैं। हम अपने घर के पास कम्युनिटी एनिमल्स को रोजाना खाना खिलाते हैं। लोगों को समझाते हैं कि उन्हें अच्छे से ट्रीट न कर सको तो बुरा व्यवहार भी न करो। – नव्या और तान्या, क्लास – 10 क्लब से ही हमने जाना कि जानवरों में जान होती है, उन्हें भी दर्द होता है। इसलिए उन्हें भी देखभाल की ज़रूरत है। अब जब घर पर चिड़िया आती है तो हम सबसे पहले कसोरे में पानी डालते हैं, उनके लिए दाना रखते हैं और अब जो ठंड आने को है तो कम्युनिटी डॉग्स के लिए बिस्तर का इंतज़ाम करेंगे। क्लब से ही हमारे अंदर संवेदना आई है। – मानसी और भाविशा, क्लास – 10 जब से एनिमल फैन क्लब का अध्यक्ष बना तब से स्थानीय आवारा पशुओं की स्थिति सुधारने पर काम कर रहा हूं। ऑनलाइन रिसर्च के जरिए हमने अंतरराष्ट्रीय पशु संरक्षण क्लबों से भी संपर्क किया। युवाओं को घर के आस-पास किसी जानवर को अडॉप्ट करने को कहा और उसे लेकर एक प्रोजेक्ट भी बनवाया। अन्य देशों के प्रोजेक्ट्स को भी स्टडी किया। – गौरव, अध्यक्ष, क्लास- 10
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बच्चों में करुणा जगाने के लिए जोड़ रहे एनिमल फैन क्लब से
