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बाबा रामप्रसादाचार्य का तिलक खुद श्रीसीता ने किया:महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य बोले-सीताकुंड के निर्जन वन में आचार्य श्री ने कठोर तप की




बिंदु गद्दी का उदय जिनके कठोर तप से हुआ। ऐसे बाबा रामप्रसादचार्य की भक्ति से प्रसन्न होकर श्रीसीता ने उनका स्वयं तिलक पर अपनी कृपा प्रदान की।वे भक्ति के प्रकांड आचार्य होने के साथ अयोध्या के सिद्ध संतों में अग्रणी माने जाते थे। यह विचार विंदु संपद्राय की सर्वोच्च पीठ दशरथ महल के महंत देवेंद्रपसा्रदाचार्य ने कही। वे आश्रम के संस्थापक स्वामी रामप्रसादाचार्य को जयंती पर उनको नमन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबा रामप्रसादाचार्य अभी भी ऐसे सुगंधित-सुशोभित पुष्प की भांति खिले हैं, जिससे अयोध्या के साथ अध्यात्म का संपूर्ण आकाश सुगंधित हो रहा है। दशरथमहल बड़ास्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य महांत देवेंद्रप्रसादाचार्य ने आगे कहा कि वह बिंदु परंपरा के संस्थापक आचार्य, दिग्गज दार्शनिक एवं भक्ति के प्रकांड आचार्य थे। स्वामी रामप्रसादाचार्य जैसेसच्चे सद्गुरु का यही चमत्कार है कि उसकी उपस्थिति और स्मृति मात्र से जीवन का रस-रसायन बदल जाता है। लक्ष्मणकिलाधीश महांत मैथिलीरमणशरण ने कहा, साधना के पथ पर बहुतेरे बढ़ते हैं और उनको अनुकूलता का भान भी होता है, किंतु पीढ़ियां गुजर जाने के बाद ऐसा कोई विरला होता है, जो साधना करते हुए सिद्धि का आलिंगन करता है। स्वामी रामप्रसादाचार्य इसी कोटि के संत थे। हनुमन्निवास के महंत एवं राम मंदिर की धार्मिक समिति के सदस्य आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण ने कहा कि वह साधना के पथ पर उस प्रकाश स्तंभ की तरह हैं, जो साध्य तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करता है। राम मंदिर की धार्मिक समिति के एक अन्य सदस्य एवं प्रख्यात कथाव्यास डा. रामानंददास ने कहा, प्रवर्तक तो बिंदु परंपरा के हैं, किंतु प्रेरक पूरी भक्ति परंपरा के हैं। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं संकट मोचन सेना के अध्यक्ष संजयदास ने कहा, रामप्रसादाचार्य जैसे आचार्यों ने यह विश्वास बनाए रखा है कि दिल से चाहो, तो असंभव कुछ भी नहीं है। बिंदु परंपरा से ही अनुप्राणित रसिक पीठाधीश्वर महांत जन्मेजयशरण ने कहा, सत्यं ब्रह्म जगत मिथ्या का सूत्र तो आचार्य शंकर ने दिया, किंतु उसे अपने आचरण से स्वामी रामप्रसादाचार्य जैसे आचार्यों ने फलीभूत किया। बड़ा भक्तमाल के महांत अवधेशदास ने कहा, स्वामी रामप्रसादाचार्य जैसी विभूतियां साधना के पथ पर मील के पत्थर जैसी होती हैं और उन्हें देख कर हम साध्य की ओर प्रेरित होते हैं। जगद्गुरु अर्जुनद्वाराचार्य कृपालु रामभूषणदेवाचार्य ने आभार ज्ञापित किया। कहा कि और ऐसी दिव्य विभूति को रामनगरी के प्रतिनिधि संतों के साथ सहित तपस्वी गुरु महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य के मार्गदर्शन में अनुभूत करना अपूर्व है। आचार्य को नमन करने वालों में बड़ी संख्या में साधु-संत रहे। सायं फूल बंगला की झांकी से भी परमाचार्य के प्रति आस्था अर्पित हुई।



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