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बारां जिला प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहरों से भरपूर है, पर प्रचार की कमी से पर्यटन पिछड़ा है। पर्यटन सर्किट से जोड़ने की योजना सिर्फ कागजों में है, जिससे पर्यटकों की आवाजाही कम रहती है।
साढ़े तीन दशक बाद भी बारां में पर्यटन विभाग का कार्यालय न खुलना सरकार की अनदेखी दिखाता है। जिले में रामगढ़ और शेरगढ़ जैसी अंतरराष्ट्रीय पहचान की क्षमता वाली जगहें हैं। रामगढ़ धाम में 10-12 किलोमीटर परिक्रमा मार्ग के लिए 10 करोड़ का बजट ऐलान हुआ, पर वन विभाग की अनुमति न मिलने से काम रुका। 7 करोड़ में से 4.5 करोड़ के काम ही हुए। रोप-वे से पर्यटक बढ़ सकते हैं।
शेरगढ़ अभयारण्य में परवन नदी पर बोटिंग का सर्वे हो गया है। शाहाबाद में चीतों की आवाजाही से चीता हब बन सकता है। 17 हजार वर्ग किलोमीटर कॉरिडोर में शाहाबाद अहम है, पर लेपर्ड सफारी भी शुरू नहीं हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इन तीनों को ट्राएंगल के रूप में विकसित कर बारां में पर्यटन कार्यालय खोला जाए, तभी पर्यटन को गति मिलेगी।
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बारां में प्रचार की कमी से पर्यटन पिछड़ा:सरकारी उदासीनता से टूरिज्म को नहीं मिल रही गति
