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बिहारशरीफ-15 मिनट की बारिश से दावों की खुली पोल:निगम क्षेत्र में मेन रोड पर घुटनों तक भरा पानी, कागजों पर निरीक्षण और उड़ाही के फैसले




स्मार्ट सिटी बनने की राह पर अग्रसर बिहार शरीफ में शनिवार देर शाम 15 मिनट तक झमाझम बारिश हुई। अचानक हुई बारिश ने नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल दी। शहर के प्रमुख इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया। मुख्य सड़कें रात के अंधेरे में किसी उफनती नदी जैसी नजर आने लगी। सड़क पर घुटनों तक भरा पानी बारिश के बाद बिचली खंदक, पुलपर, टेलीफोन एक्सचेंज, अंबेर मोड़, रांची रोड, कटरा बाजार समिति और मुख्यालय के अलग-अलगा इलाकों का नजारा देखने लायक था। तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि एक महिला हाथ में दूध का बर्तन लिए घुटनों तक भरे गंदे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर है। ठेले वाले और गुब्बारे बेचने वाले फुटपाथी दुकानदार भी इसी ‘जल प्रलय’ के बीच अपना रोजगार तलाश रहे हैं। सबसे बुरा हाल व्यावसायिक इलाकों का है। बड़े शोरूम के बाहर खड़ी दर्जनों बाइक पानी में आधी डूबी गई। टू-व्हीलर और रिक्शा गहरे पानी को चीरते हुए ऐसे आगे बढ़ रहे थे, मानो सड़क पर नहीं, नाव पर सवार हो। बैठक से भी कुछ नहीं निकला हाल ही में नगर निगम सभागार में नगर आयुक्त कृत्यानंद रंजन ने अधिकारियों के साथ बैठक की थी। उन्होंने खुले नालों की सूची मांगी थी, जलनिकासी पर विशेष जोर दिया था। सभी पंपिंग सेट और मशीनों को दुरुस्त रखने का कड़क आदेश दिया था। उन्होंने बड़े गर्व से कहा था कि, ‘बारिश को लेकर नगर निगम पूरी तरह अलर्ट है।’ लेकिन 15 मिनट की बारिश ने बता दिया कि निगम का अलर्ट मोड शायद ‘स्लीप मोड’ में चला गया है। निरीक्षण और उड़ाही के फैसले केवल कागजों पर! नगर निगम की इंजीनियरिंग टीम और स्वयं नगर आयुक्त की ओर से वार्डों में जाकर नाली-गली और जलनिकासी योजनाओं का जमीनी निरीक्षण करने के दावे भी किए जा रहे थे। इसके अलावा, महापौर की अध्यक्षता में हुई सशक्त स्थायी समिति की पहली बैठक में मानसून से पहले शहर को जलजमाव से मुक्त कराने पर विशेष चर्चा हुई थी। बैठक में ब्रह्म स्थान, देवीसराय, खंदकपर, रांची रोड, मथुरिया मोहल्ला और शिवपुरी जैसे संवेदनशील इलाकों में पंपिंग सेट लगाकर पानी निकालने और सभी छोटे-बड़े नालों की उड़ाही कराने का बड़ा फैसला लिया गया था। लेकिन, हकीकत यह है कि न तो नालों की सफाई हुई और न ही पंपिंग सेट नजर आए। लोगों ने उठाए सवाल समिति ने अधिकारियों से कहा था कि उड़ाही कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि बारिश का पानी सड़कों पर जमा न हो। लगता है अधिकारियों ने इस आदेश को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया और शहर की सड़कों को ही नाला बना दिया। अब शहर की जनता नगर निगम से यही सवाल कर रही है कि बैठकों और कागजों पर जो ‘वेनिस’ बनाने का सपना दिखाया गया था, वह सड़कों पर क्यों दिख रहा है?



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