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बिहार के 9 जिलों में हुए पत्रकारों की हत्या के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सम्राट सरकार से रिपोर्ट मांगी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गुरुवार को बिहार सरकार को एक चिट्ठी मिली है। इस चिट्ठी के बाद बिहार सरकार के गृह विभाग ने राज्य के 9 जिलों के SP और पब्लिक प्रोसिक्यूटर को निर्देश जारी कर 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट तलब की है। गृह विभाग के विशेष सचिव-सह-प्रभारी निदेशक सुधांशु कुमार चौबे ने बेगूसराय, समस्तीपुर, गयाजी, सीवान, रोहतास (सासाराम), भोजपुर (आरा), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), मधुबनी और मुजफ्फरपुर जिलों से पत्रकारों की हत्या से संबंधित दर्ज मामलों की जांच, ट्रायल और निष्पादित मुकदमों की अपडेट रिपोर्ट मांगी है। गृह विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा प्राप्त प्रपत्र और संबंधित थाना कांड संख्या को संलग्न करते हुए 14 अगस्त तक अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था) के ई-मेल तथा अभियोजन निदेशालय के ई-मेल पर रिपोर्ट अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। बेगूसराय के पत्रकार सुभाष हत्याकांड की फाइल भी खुलेगी परिहारा ओपी (बखरी थाना क्षेत्र) के रहने वाले अर्जुन महतो के बेटे और पेशे से जर्नलिस्ट सुभाष कुमार की हत्या 20 मई 2022 की रात सरेआम गोली मारकर दी गई थी। इस घटना को लेकर बखरी थाना में कांड संख्या- 162/2022 दर्ज किया गया था। 20 मई 2022 की रात सांखू गांव में एक शादी समारोह का आयोजन था। समारोह में डीजे पर डांस करने को लेकर गांव के बाहर से आए युवकों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच कहासुनी और झड़प हो गई थी। इस विवाद के दौरान बीच-बचाव और विरोध करने पर अपराधियों ने पत्रकार सुभाष कुमार को निशाना बनाने की साजिश रची। शादी का कार्यक्रम खत्म होने के बाद जब सुभाष घर लौट रहे थे, तभी घात लगाए अपराधियों ने उनके सिर में बेहद करीब से गोली मार दी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। पत्रकार की हत्या के बाद जिले में भारी आक्रोश फैल गया था और लोग सड़कों पर उतर आए थे। मामले में आरोपियों खगड़िया जिला के रानी शकरपुरा गांव के रहने वाले रोशन कुमार एवं प्रियांशु कुमार तथा पत्रकार सुभाष के ग्रामीण नितेश कुमार उर्फ लूटन महतो, बबलू राठौर उर्फ बाबुल और सौरभ कुमार हत्या के बाद फरार हो गए। कोर्ट के आदेश पर आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाकर कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की गई। पुलिस की दबिश के बाद 2 आरोपियों ने किया था सरेंडर पुलिस की चौतरफा दबिश के कारण आरोपी बाबुल कुमार और नितेश कुमार ने सबसे पहले आत्मसमर्पण कर दिया। लेकिन घटना के बाद मुख्य आरोपी फरार होकर मध्य प्रदेश, दिल्ली और ओडिशा होते हुए पश्चिम बंगाल छुप गए थे। बदमाशों ने हुगली जिले के चंदननगर थाना क्षेत्र में फर्जी आधार कार्ड तक बनवा लिए थे। जिसके फर्जी नाम-पता पर रह रहा था। घटना के लगभग 60 दिनों बाद जुलाई 2022 में बेगूसराय पुलिस, पश्चिम बंगाल पुलिस और ओडिशा पुलिस के एक विशेष संयुक्त ऑपरेशन में मुख्य आरोपी रोशन कुमार, प्रियांशु कुमार और सौरभ कुमार को चंदननगर (पश्चिम बंगाल) से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर बिहार लाया गया और हत्या में प्रयुक्त देशी पिस्तौल भी बरामद की गई। अब केंद्र सरकार द्वारा बिहार के 9 जिलों के मामलों की समीक्षा किए जाने से यह उम्मीद जगी है कि पत्रकार सुभाष कुमार हत्याकांड समेत अन्य सभी लंबित मामलों में स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाई जाएगी। गृह विभाग ने सभी संबंधित मुख्य अभियोजक, प्रभारी मुख्य अभियोजक, लोक अभियोजक तथा अपर लोक अभियोजकों को आपस में समन्वय स्थापित कर केस के विचारण और स्टेटस की पूरी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
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बिहार के पत्रकारों की हत्या पर केंद्र सरकार गंभीर:केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सम्राट सरकार से मांगी रिपोर्ट, बेगूसराय के जर्नलिस्ट सुभाष हत्याकांड की फाइल भी खुलेगी
