Headlines

बैंक मैनेजर ने फर्जी दस्तावेजों से पास कराया लोन:EOW ने 5 पर FIR की, ₹8.85 लाख आपस में बांटे




आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र की एमपी नगर शाखा के मैनेजर और मशीन सप्लाई करने वाली फर्मों के संचालकों समेत पांच आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। मामले की शिकायत दो साल पहले की गई थी, जिसमें बताया गया था कि एक युवा कारोबारी के नाम पर उसके मामा ने 10 लाख रुपए का लोन ले लिया था। मामले की छानबीन में सामने आया कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र की एमपी नगर शाखा के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर राहुल भोसले, फाइनेंशियल एडवाइज़र राजीव राजपूत और मशीन सप्लाई करने वाली दो फर्मों के लोगों के साथ मिलकर फर्ज़ी कागजों के सहारे यह लोन पास कराया था। इस मामले में मंजूर किए गए ऋण की 8 लाख 85 हजार की रकम इन सभी ने मिलकर आपस में बांट ली गई। छानबीन में ये भी उजागर हुआ कि बैंक की इसी ब्रांच में तीन और मामलों में भी इसी तरह हेराफेरी की गई। प्रारंभिक जांच के बाद ईओडब्ल्यू भोपाल ने बैंक मैनेजेर राहुल भोसले, फाइनेंशियल एडवाइज़र राजीव राजपूत, विशाल इंटरप्राईसेस की संचालक नईमा अली और कमर अली एवं ग्लोबल मार्केटर्स के संचालक उमर अली के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 120-बी के तहत एफआईआर जर्द की गई है। न निरीक्षण, न वेरिफिकेशन, लगाई फर्जी रसीदें इस मामले में पड़ताल के दौरान यह सामने आया कि बैंक ने कई लोग एक ही दिन में मंजूर करते हुए उसके लिए सप्लायरों को राशि भी जारी कर दी। जांच में सामने आया कि लोन के लिए मार्जिन मनी दिखाने के लिए भी फर्जी रसीदें लगाई गईं। इसके अलावा मशीन सप्लाई करने वाली फर्म विशाल इंटरप्राईसेस का बैंक में दिया गया पता पूरी तरह फर्जी था और उसके कोटेशन में जीएसटी नंबर किसी दूसरे ही व्यक्ति का था। इसके बाद ये रकम ग्लोबल मार्केटर्स नाम की कंपनी के खातों में भेजी गई और फिर इसे निजी खातों में ट्रांसफर कर आपस में बांट लिया गया। ऐसे में शिकायतकर्ता को न तो लोन मिला और न ही मशीनें। इस हेराफेरी का खुलासा तब हुआ जब शिकायत करने वाले युवक के मामा की मौत के बाद बैंक ने रिकवरी की कार्रवाई शुरू की। पड़ताल में मिले ऐसे कई घोटाले जब ईओब्ल्यू ने जांच की तो ऐसे एक नहीं कई मामले मिले। मार्च 2024 के ही दस्तावेजों की छानबीन के दौरान ईओडब्ल्यू को चार ऐसे लोन प्रकरण मिले, जिनमें इसी तरह मशीन के नाम पर लोन लेकर फर्जीवाड़ा किया गया। ये सभी लोन खाते बाद में एनपीए हो गए। इन सबकी जानकारी होने के बावजूद शाखा प्रबंधक ने न तो वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया और न ही कोई कार्रवाई की। ऐसे में अब ईओडब्ल्यू इस मामले में बैंक से अन्य रिकॉर्ड भी तलब करने की तैयारी में है, ताकि लोन के नाम पर हुई इस लाखों रुपए की धांधली का सही आंकड़ा सामने आ सके।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *