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‘आ गई @#$! विक्टिम कार्ड खेलने!’ ‘#@ $# @#$!’ ‘लड़का गुर्जर है, अच्छा खासा पैसा मिलेगा.. अब तो मजे ही मजे हैं दीदी!’ ‘एक्सीडेंट को मर्डर की तरह फ्रेम कर रही है, ताकि फेमस हो सके @#$!’ सोशल मीडिया पर मुझे इस तरह की अनगिनत गालियां दी जा रही हैं। कई गालियां ऐसी हैं, जो मैं बता भी नहीं सकती। आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये गालियां क्यों दी जा रही हैं… मैं पूरी कहानी बताती हूं। मेरा नाम शिवानी चौहान है। फीमेल बाइकर हूं। दिल्ली के कालकाजी इलाके में रहती हूं। लोग मुझे सिया नाम से भी जानते हैं। 10 दिन पहले यानी 13 सितंबर की है। रविवार का दिन था। मैंने चेहरे पर कपड़ा बांधा। हेलमेट पहना। सुबह करीब 6 बजे अपनी स्पोर्ट्स बाइक लेकर गुरुग्राम के लिए निकल पड़ी। साथ तीन-चार मेल बाइकर भी थे। हर रविवार की तरह उस दिन भी बाइकर्स का ग्रुप एक कैफे में मिलने वाला था। मैं गोल्फ कोर्स रोड पर बाइक वाली लेन में थी। तभी एक कार मेरी तरफ आने लगी। उसमें चार लड़के थे। कार जैसे ही बाइक के करीब पहुंची, लड़कों ने शीशा नीचे किया और कार के अंदर बुलाने का इशारा करने लगे। वो लोग कुछ बोल रहे थे, लेकिन हेलमेट की वजह से सुनाई नहीं दिया। पहले लगा कि बाइक देखना चाह रहे होंगे। ऐसा पहले भी कई बार हुआ है। लोग मुझे बाइक चलाते देखते हैं तो कभी अपनी बाइक या कार मेरे बराबर लाने लगते हैं, कभी रेस लगाने की कोशिश करते हैं। इसलिए मैंने स्पीड कम कर ली। अब लड़के हाथों से अश्लील इशारे करने लगे। पता चला कि चारों शराब पीकर धुत हैं। मैं डर गई और बाइक की स्पीड बढ़ा दी। वो लोग बार-बार कार मेरी बाइक के पास ला रहे थे। मैं तीसरी लेन में थी और वो लोग पहली लेन में। मैंने सोचा स्पीड और बढ़ाकर आगे निकल जाऊंगी, तो इनसे पीछा छूट जाएगा। आगे चौराहा था। सामने से दो ऑटो आ रहे थे। मैंने बाइक धीमी कर दी। तभी कार तीसरी लेन की तरफ आ गई। मैं कुछ समझ पाती, उससे पहले ही उन्होंने साइड से मुझे टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही मैं गिर पड़ी और काफी दूर तक घसिटती चली गई। वो लोग वहां से भाग गए। मैं उठी तो सबसे पहले अपने कपड़े देखे कि कहीं फट तो नहीं गए। घुटनों और कोहनियों पर ऐसी चोट लगी थी कि खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। हेलमेट लगा था इसलिए सिर पर चोट नहीं आई। अगर बाइक की स्पीड ज्यादा होती या पीछे से कोई दूसरी गाड़ी आ रही होती, तो शायद नहीं बचती। मेरे बाइकर्स साथियों ने कार का पीछा किया, लेकिन तब तक वे लोग भाग चुके थे। फिर मैं एक जगह इतमिनान से बैठी। अपनी बाइक पर लगे कैमरे को चेक किया। जब वीडियो देखा तो मेरा गुस्सा और बढ़ गया। मेरी कोई गलती नहीं थी। न उनसे कुछ कहा था, न उनके रास्ते में आई थी। घर पहुंची तो चल भी नहीं पा रही थी। मां ने देखते ही पूछा- चोट लग गई क्या? मैंने कहा- हां बाइक फिसल गई। पापा को भी इस बारे में कुछ नहीं बताया। बस भाई को पूरा वीडियो दिखाया। भाई ने बोला- ‘वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करो और थाने चलो। उन लड़कों पर केस करेंगे।’ हमने घटना के दो दिन बाद मंगलवार को मुकदमा दर्ज करवाया। तब पता चला कि लड़के का नाम कल्याण बैंसला है, लेकिन वीडियो वायरल होते ही, लोगों ने सोशल मीडिया पर मुझे गालियां देनी शुरू कर दी। दो दिन बाद कुछ यूट्यूबर्स घर आ गए। तब पापा को एक्सीडेंट के बारे में पता चला। उसके बाद रिश्तेदार भी पापा को फोन करने लगे। कहने लगे- क्या जरूरत थी बेटी को बाइक दिलाने की। न वो सड़कों पर इस तरह घूमती न ये सब होता। ये सड़कें लड़कियों के बाइक दौड़ाने के लिए नहीं बनी हैं।’ पड़ोसी भी कहने लगे कि ‘ये सब तो बेटी को बाइक दिलवाने से पहले सोचना चाहिए था… लड़कियां इस तरह सड़कों पर तेज स्पीड से बाइक भगाएंगी तो ये सब होगा ही। फिर पापा ने उन्हें जवाब दिया कि- बेटी बाइक चलाती है तो इसमें गलत क्या है? कहां लिखा है कि बाइक चलाना केवल मर्दों का काम है, लड़कियां बाइक नहीं चला सकतीं। कुछ लोग इस मामले को जाति से भी जोड़ रहे हैं। कह रहे हैं कि शिवानी, राजपूत है और लड़के गुर्जर। इसलिए मामले को बेवजह बढ़ाया जा रहा है। पैसों के लिए केस किया गया है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन लड़कों के समर्थन में रैली और महापंचायत हो रही हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि लड़का शादीशुदा है। उसकी जिंदगी खराब हो जाएगी। ऐसे छोटे-मोटे हादसे होते रहते हैं। मैं कहती हूं कि अगर वह शादीशुदा है, तब तो इस तरह किसी लड़की का पीछा करना और भी ज्यादा खतरनाक है। शिवानी की कहानी सुन रही भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला ने अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बच्चू सिंह बैंसला को फोन किया। उधर से बच्चू सिंह ने जवाब दिया- हां, गुर्जर समाज रैलियां और महापंचायत कर रहा है, क्योंकि मीडिया ने पूरी गुर्जर कौम के खिलाफ मीडिया ट्रायल शुरू कर दिया है। यह छोटा सा मुद्दा है, इससे पहले पूरे देश में ऐसे लाखों केस हो चुके हैं। वैसे भी ऐसे केस में गलती हमेशा बड़े वाहन वाले की मानी जाती है। लड़की वाले थाने जाए, कोर्ट जाएं, लेकिन पूरी कौम को न घसीटें। कौम को घसीटेंगे तो अच्छा नहीं होगा।’ अब शिवानी फिर से अपनी कहानी सुनाती हैं… वीडियो वायरल होते ही कुछ लोगों ने तो देशभर की कई महिला बाइकर्स ने मुझे मैसेज किए। अपनी-अपनी कहानियां बताईं। पुणे की एक लेडी बाइकर ने बताया कि कुछ लड़कों ने इसी तर उसका पीछा कर बाइक से टक्कर मारी थी, वो दो साल से बिस्तर पर हैं। मेरी ही तरह एक बाइकर हैं देवी बैनर्जी। 40 साल से बाइकिंग कर रही हैं। 60 साल की हैं। कहती हैं कि छाती, हाथ, कंधे सबकुछ प्रोटेक्टर जैकेट से ढंक लेते हैं। बालों को हेलमेट में छिपा लेते हैं फिर भी बॉडी शेप से पता चल जाता है कि लड़कियां हैं। लड़की देखते ही लोग छेड़खानी करने लगते हैं। खुद ही रेस लगाने लगते हैं। लड़के पास आने लगे और लड़कियों की बाइक की स्पीड कम न हो, वो रुके नहीं तो लड़कों के ईगो की नस दब जाती है। वो फिर सोचने लगते हैं कि कैसे भी करके आज इस लड़की को हराना है, फिर भले ही उसे टक्कर मारनी पड़े। अपनी सेफ्टी के लिए फीमेल बाइकर झुंड में बाइक राइडिंग करती हैं। सोलो राइड में हमेशा खतरा बना रहता है। जब मैंने इन फीमेल राइडर्स की बातें सुनी तो लगा कि हर फीमेल बाइकर को ये सब झेलना पड़ता है। सड़क पर कोई लड़की बाइक लेकर निकले तो पुरुषों का रवैया ही बदल जाता है। कमेंट करते हैं- ‘मैडम, क्या बाइक चला रही हो।’ जैसे लड़की का बाइक चलाना कोई तमाशा हो। मानो बाइक पर बैठने का हक सिर्फ पुरुषों का हो। लड़की बाइक चलाए तो सवाल-‘कहां जा रही हो?’ ‘इतनी तेज क्यों चला रही हो?’ ‘बाइक चलाने की क्या जरूरत है?’ लेकिन कोई पुरुष यही काम करे तो कोई सवाल नहीं। हमने बाइकिंग को भी जेंडर के हिसाब से बांट दिया है। बाइक पुरुषों की। स्कूटी लड़कियों की। अगर कोई लड़की इस दायरे से बाहर निकल जाए तो सड़क पर ही उसे सबक सिखाने की कोशिश शुरू हो जाती है। मेरे साथ उस दिन भी यही हुआ। उन्हें यह मंजूर नहीं था कि मैं अपनी रफ्तार से आगे बढ़ती रहूं। उन्होंने मुझे टक्कर मार दी। सोशल मीडिया पर सवाल भी मुझसे हुए। मुझे ही कठघरे में खड़ा कर दिया गया। जब मैंने बाइक चलाना शुरू किया तो घरवालों ने हमेशा सपोर्ट किया। भाई हो या पापा किसी ने मुझे मना नहीं किया। मेरे करीब 18 कजिन हैं और उनमें से लगभग सभी भाइयों के पास बाइक है। स्कूल के दिनों में भाइयों को बाइक चलाते देखती थी। 11वीं क्लास में थी, तब एक दिन कजिन ने कहा- ‘स्कूटी छोड़ो, बाइक चलाकर देखो।’ पहली बार में तो किक ही नहीं मार पाई लेकिन एक-दो बार कोशिश की तो बाइक स्टार्ट हो गई। उस दिन मुझे बहुत खुशी हुई। लगा कि ये तो मैं भी कर सकती हूं। भाई ने गियर बदलना सिखाया। धीरे-धीरे बाइक चलाना सीख गई। उस दिन के बाद से कजिन जब भी घर आता मैं उसे बाइक पर बैठाकर घूमने निकल पड़ती। शुरुआत में भाइयों को मेरे पीछे बैठने में थोड़ी हिचक होती थी। उन्हें लगता था कि लोग कहेंगे कि भाई पीछे बैठा है और बहन बाइक चला रही है। मैं कहती थी-‘लोग देखेंगे तो कहेंगे कि कितना अच्छा भाई है, जो अपनी बहन को सपोर्ट करता है।’ धीरे-धीरे ऐसा टाइम आया कि भाई कहने लगे-‘तुझे बाइक सिखाकर गलती कर दी। अब हमे बाइक चलाने को ही नहीं मिलती।’ पापा कालकाजी में प्रॉपर्टी का बिजनेस करते हैं। मैं भी उनके साथ बिजनेस में हाथ बंटाती हूं। जब पूरी तरह बाइक चलाना सीख गई तो एक दिन पापा से कहा कि बिजनेस में मेरी भी मेहनत है, इसलिए मेरे हिस्से के पैसे मुझे दे दीजिए। उन्हीं पैसों से भाई और मां के साथ जाकर स्पोर्ट्स बाइक खरीद ली। लेकिन इस बारे में पापा को नहीं बताया। बाइक पार्किंग में खड़ी रहती थी। तीन दिन पापा ने पूछा-‘नीचे बाइक किसकी खड़ी है जो बाइक खड़ी रहती है, वह किसकी है?’ मैंने कोई जवाब नहीं दिया। पापा समझ गए कि उनसे जो पैसे लिए थे उसी से बाइक खरीदी है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा-‘इसे कहां चलाओगी? दिल्ली जैसा शहर इसके लायक नहीं है।’ तब मुझे लगा था कि पापा बेवजह चिंता करते हैं। अब समझ आता है कि उनकी चिंता ठीक थी। ——————————————— ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1-ब्लैकबोर्ड-फर्जी रेप केस और SC/ST एक्ट भी झूठा:20 साल बाद बरी, मां-बाप और दो भाइयों की मौत, तीसरा पागल हुआ उत्तरप्रदेश के ललितपुर का सिलावन गांव। शाम का वक्त। करीब 44-45 साल का एक शख्स लंगड़ाते हुए चला जा रहा था। वो इधर-उधर देख रहा था, जैसे किसी को पहचानने को कोशिश कर रहा हो। पूरी खबर पढ़ें… 2-ब्लैकबोर्ड-नाचने से ज्यादा किसी के साथ सोकर कमा लेगी:बेटी को देखकर बोला- इसे भी साथ लाना; वो डांसर जो बिन शादी के मां बन गईं रात करीब डेढ़ बजे का वक्त था। तेज आवाज में गाने बज रहे थे। मैं घाघरा-चोली पहने स्टेज पर थी। 100 मर्दों के बीच नाच रही थी। तीन घंटे से नाचते-नाचते शरीर थक चुका था। भीड़ से एक मर्द स्टेज पर चढ़ आया। दुपट्टा खींचा और कमर में हाथ डाल दिया। मैं घबरा गई। पूरी खबर पढ़ें…
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ब्लैकबोर्ड-लड़कों ने कार में बुलाया, नहीं गई तो धक्का मारा:लंबी चोटी देखकर पीछा किया, लोग कह रहे-लड़का गुर्जर है, दीदी को बहुत पैसा मिलेगा
