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सनातन परंपरा में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी को आरोग्यता और मोक्ष पाने का सबसे बड़ा व्रत माना जाता है। इस बार यह एकादशी दो महाशुभ संयोगों भरणी नक्षत्र और सिद्ध योग के सुयोग में आ रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान नारायण की उपासना से जीव को 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने और करोड़ों गौदान के समान महापुण्य प्राप्त होता है। इस बार व्रत दो दिन है। 10 जुलाई को गृहस्थ जीवन वाले श्रद्धालु व्रत रखेंगे। जबकि 11 जुलाई को वैष्णव संप्रदाय साधु-संत और संन्यासी यह व्रत करेंगे। मार्कण्डेय पुराण की कथा के अनुसार इस दिन व्रत रखने के साथ प्रभु का चरणामृत ग्रहण करने से असाध्य रोगों जैसे कुष्ठ समेत सभी तरह के चर्म रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित किशोरी शरण जी के अनुसार 10 जुलाई की सुबह 9:48 बजे तक भरणी नक्षत्र रहेगा। इसके बाद कृत्तिका नक्षत्र की शुरुआत होगी। साथ ही इस दिन शूल योग और सिद्ध योग का दुर्लभ सुयोग बन रहा है। सिद्ध योग में की गई पूजा का फल कभी निष्फल नहीं जाता। पीतांबरधारी श्रीहरि की आराधना से मिलती है पुण्यफल की प्राप्ति विशेष पूजन मुहूर्त जामताड़ा। सनातन परंपरा में योगिनी एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन पीतांबरधारी भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” महामंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।
आज है योगिनी एकादशी, भगवान विष्णु की पूजा और दान का विशेष महत्व शास्त्रों के अनुसार, योगिनी एकादशी के दिन पीतांबर-धारी भगवान विष्णु की पूजा और महामंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय… का जाप करना चाहिए। इस दिन किए गए छोटे-छोटे दानों का फल करोड़ों गुना होकर वापस मिलता है। इस दिन राहत देने वाली सामग्री जैसे पानी से भरा हुआ घड़ा, छाता, जूता, पंखा और सत्तू आदि दान करना चाहिए। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन सामग्रियों का दान करने से सीधे सोने के दान के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है और मनुष्य सभी सांसारिक सुखों को भोगकर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है। गृहस्थों के लिएः 9 जुलाई की रात 10:11 बजे से ही एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी, जो 10 जुलाई की रात 8:35 बजे तक रहेगी। पूजा का समय 10 जुलाई की सुबह 7:15 बजे से सुबह 10:43 बजे तक (सिद्ध योग में)। जो लोग वैष्णव संप्रदाय से जुड़े हैं या जो संन्यासी हैं, वे 11 जुलाई को व्रत रखेंगे और पारण 12 जुलाई को करेंगे।
