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भोपाल के शाहपुरा तालाब पर NGT का कड़ा रुख:कहा- एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ना बंद करें; 10 दिन में तय करें FTL और बफर जोन




नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (NGT) ने भोपाल के शाहपुरा तालाब के संरक्षण, सीमांकन और अतिक्रमण हटाने के एक मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति श्योकुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने सुनवाई के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालने और अदालत का समय बर्बाद करने की प्रवृत्ति पर कड़ा ऐतराज जताया है। पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना की याचिका पर सुनवाई की गई। एनजीटी ने निर्देश दिए कि एसडीएम कोलार, जल संसाधन विभाग और भोपाल नगर निगम आपस में समन्वय बनाकर गठित समिति के साथ अगले 10 दिन के भीतर शाहपुरा झील का वास्तविक एफटीएल (फुल टैंक लेवल) और बफर जोन का सीमांकन हर हाल में पूरा करें। अतिक्रमण पर तत्काल चलेगा बुलडोजर एनजीटी ने एसडीएम कोलार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जैसे ही एफटीएल और बफर जोन का निर्धारण पूरा हो, शाहपुरा झील के कैचमेंट और 50 मीटर बफर एरिया में मौजूद सभी अवैध और अस्थायी निर्माणों को तत्काल प्रभाव से हटाने की कार्रवाई शुरू की जाए। लापरवाही पर एसडीएम कोलार को फटकार सुनवाई के दौरान बिना पूरी जानकारी और तैयारी के उपस्थित होने पर अधिकरण ने एसडीएम कोलार पीसी पांडे के प्रति गंभीर नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने उन्हें भविष्य में पूरी तैयारी के साथ ही अदालती कार्यवाही में उपस्थित रहने के निर्देश दिए। निगम को जवाब दाखिल करने की अंतिम चेतावनी भोपाल नगर निगम द्वारा अब तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल न करने पर एनजीटी ने नाराजगी जताई और अगली सुनवाई से पहले अनिवार्य रूप से अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। ड्रोन सर्वे में सामने आ चुका अतिक्रमण मामले में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल मास्टर प्लान (33 मीटर) और वेटलैंड्स रूल्स, 2017 (50 मीटर) के तहत एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के माध्यम से ड्रोन सर्वे कराया गया था। 24 जुलाई को हुए इस सर्वे में कैचमेंट एरिया में कई स्थायी व अस्थायी निर्माण और अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने बताया कि शाहपुरा झील एक अधिसूचित वेटलैंड है। इसके बावजूद झील में लगातार बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी बहाया जा रहा है और बफर जोन में अतिक्रमण बने हुए हैं, जो कि वेटलैंड (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 का सीधा उल्लंघन है। 30 अक्टूबर को होगी सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। जिसमें प्रशासन को की गई कार्रवाई की एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करना होगी।



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