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छोटी काशी मंडी में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा श्रद्धा, उत्साह और हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। ओडिशा के पुरी की तर्ज पर आयोजित यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ भव्य रथ में नगर भ्रमण पर निकले। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान का रथ खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया, जिससे पूरा शहर “जय जगन्नाथ” और “हरि बोल” के जयघोषों से गूंज उठा। रथयात्रा में शामिल होने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी भगवान के दर्शन और रथ खींचने के लिए उत्साहित दिखाई दिए। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भगवान जगन्नाथ मंदिर का इतिहास प्राचीन मंडी शहर के पड्डल वार्ड में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन है। बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1679 में हुई थी। मंदिर में विराजमान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की काष्ठ प्रतिमाएं विशेष रूप से ओडिशा से लाई गई थीं। तभी से यहां हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकालने की परंपरा चली आ रही है, जिसकी शुरुआत तत्कालीन राजाओं के समय हुई थी। श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारा लगाया रथयात्रा के समापन के बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहां हजारों लोगों ने भगवान का प्रसाद ग्रहण किया। मान्यता है कि “जगन्नाथ के भात को जगत पसारे हाथ, बिन भाग्य मिलता नहीं जगन्नाथ का भात।” यही कारण है कि प्रसाद ग्रहण करने के लिए भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सदियों पुरानी इस परंपरा ने एक बार फिर छोटी काशी मंडी की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा ने पूरे शहर को भक्ति, आस्था और उल्लास के रंग में रंग दिया।
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मंडी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकली:जय जगन्नाथ और हरि बोल के जयघोष से गूंजा शहर; श्रद्धालुओं ने खींचा रथ
